उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि हमारे समाज में महिला का नाम राशन कार्ड आधार कार्ड पर होता है लेकिन जमीन के कागज़ों में नहीं होता है। जबकि कानून कहता है कि महिला को भी बराबर का भूमि का अधिकार है। अगर घर की जिम्मेदारी ,बच्चों की भविष्य की प्लानिंग खुद करती है तो अगर उनके नाम जमीन हो तो वो अच्छे से फैसला ले पाएगी। सारे मेहनत का काम महिला करती है लेकिन मुखिया हमेशा पुरुष को समझा जाता है। इस मानसिकता को बदलना चाहिए ताकि घर और मज़बूत बन सके

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से राज से हुई। राज कहते है कि पिता के जमीन में बहन को हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। अगर बहन को दिया जाएगा तो अत्याचार होगा। बहन को जमीन दिया जाएगा तो दिक्कत होगा

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से लक्ष्मी से हुई। लक्ष्मी कहती है कि लड़कियों को भी भाई की तरह जमीन में अधिकार मिलना चाहिए। उसमें कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 49 वर्षीय राकेश श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होने से जमीन सुरक्षित होता है। पुरुष वर्ग में अधिकतर लोग नशाखोरी के कारण जमीन को इधर उधर कर देते है जिससे वो गरीबी में जीवन यापन करने को मज़बूर हो जाते है। लेकिन महिलाओं के नाम जमीन होने से ऐसा नहीं होता है। इस प्रकार वो अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान देती है

साल 2024 में राष्ट्रीय महिला आयोग को 25743 शिकायतें मिलीं जिसमें से 6,237 (लगभग 24%) घरेलू हिंसा से जुड़ी थीं. इसी रिपोर्ट के अनुसार 54% शिकायतें उत्तर प्रदेश से आईं, जो घरेलू हिंसा से जुड़ी शिकायतों में उत्तर प्रदेश की प्रमुखता को दिखाता है. उत्तर प्रदेश से 6,470 शिकायतें आई थीं, तमिलनाडु से 301 और बिहार से 584 शिकायतें दर्ज की गई थीं.

ज़िन्दगी के कुछ पलों में लड़को को भी रोने का मन करता है और ऐसे समय में रो लेना कितना ज़रूरी है। पर क्या हमारा समाज इतनी आसानी से लड़कों को रोने की आज़ादी दे दे सकता है ? क्या केबल रोने या न रोने से ही साबित होता है की वो इंसान कितने मज़बूत किरदार का मालिक है ? और क्या इसी एक वाक्य से हम बचपन में ही लिंग भेद का बीज बच्चो के अंदर ने दाल दे रहे है जो पड़े होते होते न जाने कितने और लोगो को अपनी चपेट में ले चूका होता है ! आप के हिसाब से अगर लड़के भी दिलका बोझ हल्का करने के लिए रोयें और दूसरों से नरम बर्ताव करे तो समाज में क्या क्या बदल सकता है ? इस सभी पहलुओं पर अपनी राय प्रतिक्रिया और सुझाव जरूर रिकॉर्ड करें अपने फ़ोन में नंबर 3 दबाकर। और हां साथियों अगर आपके मन में आज के विषय से जुड़ा कोई सवाल हो तो वो भी जरूर रिकॉर्ड करें। हम आपके सवाल का जवाब तलाश कर आप तक पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू आलू के फसल में लगने वाला झुलसा रोग के बारे में जानकारी दे रहे हैं ।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब महिला के पास जमीन होती है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। वो व्यापार शुरू कर सकती है , अपना भविष्य सुरक्षित कर सकती है ,खेती संभाल कर सकती है। जहाँ महिलाओं के पास संपत्ति होता है वहाँ घरेलु हिंसा कम होता है। बच्चों का शिक्षा बेहतर होता है। इसलिए ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि महिलाओं को जमीन देने से हिस्सा कम हो जाएगा। बल्कि यह सोचना चाहिए कि घर का भविष्य मज़बूत होगा। जितना महिलाएँ सशक्त बनेगी उतना देश सशक्त बनेगा

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि लोग सोचते है कि घर बेटा संभाल लेगा। जमीन को लेकर महिलाओं पर विचार नहीं किया जाता है। अगर महिला के पास जमीन होता है तो वो आर्थिक रूप से मज़बूत हो पाती है। बेहतर निर्णय ले पाती है। अपने परिवार को सहयोग कर पाती है। अब कानून भी कहता है कि बेटा और बेटी को बराबर का हक़ है। बस जागरूकता फैलाने की ज़रुरत है। अब जब भी घर में विरासत की बात हो तो यह समझना ज़रूरी है कि बेटी भी घर का हिस्सा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से एक व्यक्ति से बात कर रहे है। ये कहते है कि महिलाओं का अगर भाई है तो महिलाओं को संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। महिलाओं की शादी के बाद उनके पति का हिस्सा मिलना चाहिए। अगर भाई के रहते महिला को हिस्सा मिलेगा तो उनका आगे चल कर विवाद हो सकता है।