उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि 1956 हरमनई अदालत ने साफ कहा था की पहले हुई मृत की स्थिति में बेटी पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं मानी जाएगी। 1956 की कानून के अनुसार केवल पुत्र को ही उत्तराधिकार का अधिकार हासिल होता था। लेकिन बेटी को हिस्सा तब ही मिलता था जब परिवार में बेटा ना हो। इसलिए ऐसी स्थिति में बेटियों को हक़ नहीं मिलेगा।
