जरीना खान, थाना कैथुनी पोल से, कई बार महिलाये बाहर निकलने से बहुत डरती है तो इन चीजों के लिए पुलिस की पेट्रोलिंग वगैरह होना चाहिए जैसे पार्किंग व मंदिरों व स्कूलों व इन जगहों पर, अगर पुलिस पेट्रोलिंग होती रहेगी तो जैसे अपराध बढ़ने की संभावनाएं रहती है वह नहीं हो पाएगी, इन चीजों के लेकर महिला सुरक्षा सखी में सारी जानकारी हमें प्राप्त हुई है तो हम भी इसे ज्यादा से ज्यादा फैलाना चाहते हैं कि हर महिला सतर्क रहे और अपराध होने वाले संकेतों को पहचान सके.

मेरा नाम दुर्गा वैष्णव है, मेरा यह मुद्दा है कि जैसे लड़कियां दूर स्कूल जाती हैं या कहीं कॉलेज जाती है या मार्केट जाती है तो जैसे लड़कियों को ही रोका जाता है कि तुम क्यों इतनी देर कहाँ थी, क्या किया क्या नहीं किया। और मैं चाहती हूं कि हर घर में एक सुरक्षा सखी बने और अगर बेटियों की जगह बेटे से पूछा जाए की तुम कहां गए थे क्या किया, यह लड़कों के साथ हो जाए तो कुछ क्राइम कम हो सकता है.

मीना बोल रही है कोटा से, सुरक्षा महिला के लिए आज जो एक चिंता का विषय बना हुआ है, आज हम घर से नौकरी करने जाते हैं तो भी सुरक्षित नहीं है तो हमेशा डर लगता है कि आज हमारे साथ लूटपाट ना हो जाए कोई वारदात ना हो जाए, इस मुद्दे को लेकर आज मैं यहां सुरक्षा सखी मैं आई हूं जुड़ी हूं और बहुत सारे मुद्दे मुझे पता चले हैं जो शायद हमें जानकर भी अनजान थे, मुझे लग रहा है कि जिस तरीके से हमने अपना जीवन एक डर के साए में जिया है, आज हमें लग रहा है कि शायद हम अपने बच्चों को डर के साए में आगे नहीं चलने देंगे हम अपने बच्चों के लिए सुरक्षित व्यवस्था बनाएंगे, तो मैं कहना चाहती हूं कि सुरक्षा के बारे में सोचना आज बहुत ही जरूरी है और आज महिला सुरक्षा की बात आती है तो समुदाय से चालू होती है, इस समुदाय को सबसे पहले जागरूक होना बहुत जरूरी है

सुनीता गुमानपुरा थाना क्षेत्र, महिलाएं सुरक्षित नहीं है जहाँ अँधेरा रहता है, गली नुक्कड़ में महिलाये निकल नहीं पाती है, और इससे घर वाले भी बाहर निकलने नहीं देते है, बाहर नहीं निकलने से उनका उनका दिमाग भी थोड़ा कुंठित हो जाता है अगर महिलाओं और बालिकाओं को पुलिस से मदद मिल जाए तो वहां पर महिलाओं को घर से बाहर निकलने में झिझकना नहीं पड़ेगा।

गायत्री मेहता जी कहना है की अक्सर कुछ स्थान ऐसे होते है जहां पर थोड़ा अंधेरा होता है या कोई रस्ते ऐसे होते हैं जो कठिन होते हैं तो वहां जाने में थोड़ी प्रॉब्लम होती है, वहां पर बहुत से प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है जैसे असुरक्षित फील करना, कोई गलत छेड़छाड़ होने का डर, तो अगर इन चीजों को हम पुलिस तक पहुंचाते है और पुलिस इन चीजों पर ध्यान देते है तो हम इन इससे बच जाते है और हमें सुरक्षित भी फील होता है.

सुरक्षा सखि मोनिका कुमारी, केतनिपुर थाना से, यह बोल रहे है की लड़कियां घर से निकलने पर असुरक्षित महसूस करते है | चाहे वह कही ही जाये, मंदिर हो, या आस पास में कहीं हो, वह सुरक्षित महसूस नहीं करते है | रस्ते में छेड़खानी का सम्भावना बोहोत ज़्यादा होता है और अगर रास्ते में कभी छेड़खानी हो भी जाये तोह वह घरवालों को नहीं बोल पाती है | मोनिका जी विनती कर रहे है रस्ते में पुलिस या कोई भी सुरक्षा कर्मी को रखने के लिए ताकि लड़कियां सुरक्षित महसूस करे | लड़किया कुछ बोल नहीं पाती इसलिये अंदर ही अंदर डिप्रेशन में चली जाती है

सुरक्षा सखि ज़रीना यह बोल रही है की लड़कियों को बाहर जाने में कम्फर्टेबले नहीं होते है क्यूंकि उन्हें लगता है की अगर उनको कोई कुछ बोल दे तोह वह घर जा कर कैसे यह सारी बात बोलेगी | इसलिए ज़रीना जी यह कहना चाहते है की लड़कियों को अपने घरवालों के साथ सब कुछ शेयर करना चाइये ताकि किसी भी स्थिति में उनको घरवालों की मदद मिले |

बिनीता, वीयर से, सुरक्षा सखि है, और वह बच्चे और महिलाओं के सुरक्षा के बारे में बात करना चाहते है

मथुरा गेट थाना (भरतपुर) से, सुरक्षा सखी मनप्रीत यह बोल रहे है की उन्होंने पुलिस के साथ मीटिंग की है बच्चो की पढाई के बारे मैं | उन्होंने पुलिस से स्कूल के प्रिंसिपल से साथ मुलाकात करने के बारे में भी कहा है | और पुलिस ने कहा है कि वह स्कूल जायेंगे और प्रिंसिपल से मिलेंगे |

दुर्गा वैष्णव, कुन्हाड़ी थाना, कोटा से, यह बोल रहे है की वह सुरक्षा पैनल से जुड़ने के बाद | पैनल से जुड़कर उनको काफी ज्ञान प्राप्त हुई | इसके बाद वह आँगनवाड़ी और बच्चो के स्कूल में आना जाना शुरू की, इन सब जगह की अध्यापकों को उन्होंने सुरक्षा पैनल से जोड़ा |