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इस भीषण गर्मी की चपेट में आने से बचना है, तो मौसम विभाग या सरकार द्वारा दी जाने वाली जानकारी और चेतावनी को गभीरता से समझना है और उन बातों का पालन करना है. सावधानी और सतर्कता, इन दोनों बातों का हमें ध्यान रखना है |इस भीषण गर्मी से जुड़ी चेतावनी आपको कहाँ से मिलती है ? चेतावनी सुनने या देखने के बाद आप क्या कदम उठाते है ? आप या आपके आसपास लोग इस भीषण गर्मी से बचने के लिए क्या करते है ?
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता बाबूराम से बातचीत की। बातचीत में बाबूराम ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा दिया जल योजना के तहत पानी नहीं मिल रहा है।
यह नौकरी उन लोगों के लिए है कर्मचारी चयन आयोग के कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल के 17727 पदों पर काम करने के लिए इच्छुक हैं। वैसे उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने किसी भी स्ट्रीम से स्नातक पास किया हो , इसके साथ ही उम्मीदवार की न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष होनी चाहिए। इन पदों पर वेतनमान नियम अनुसार दिया जाएगा।ओबीसी व सामान्य वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए आवेदन निशुल्क है, इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन ऑनलाइन भर सकते हैं।अधिक जानकारी के लिए आवेदनकर्ता इस वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट है https://www.sarkariresult.com/ssc/ssc-cgl-2024/ योग्य उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा के बाद किया जाएगा। याद रखिए इन पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 24/07/2024 है ।
समाज में महिलाओं के साथ हो रही दुर्व्यवहार के बारे में बातचीत करते हुए वह अपनी जमीन अपनी आवाज पर भी बातचीत करते हुए
जमीन में महिलाओं को हिस्सा न मिलने पर बातचीत करते हुए
बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ प्रधानमंत्री की एक कल्याणकारी योजना है जो अच्छी तरह से और सुचारू रूप से चल रही है। लोगों को अपनी बेटियों को भी अच्छी तरह से शिक्षित करना चाहिए। कुछ लोग हैं जो कहते हैं कि नई बेटियों को कम पढ़ाया जाना चाहिए, हम अपने बेटे को बढ़ावा देंगे। अगर बेटी पढ़ती है तो वह भविष्य में मां बनेगी। वह भी एक बच्चे को जन्म देगी, तभी वह अपने बच्चों को पढ़ा पाएगी, नहीं तो वह पढ़ नहीं पाएगी, तो वह बच्चों को क्या सिखाएगी। बेटी होने पर उनकी अच्छी तरह से देखभाल की जा सकती है
महिलाओं के पास भी अपनी सम्पत्ति होनी चाहिए जिससे उनका कोई शोषण न कर सके। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को बहुत कम अधिकार हैं। अधिकार हैं, लैंगिक असमानता मुख्य कारण है, भूमि और प्रकृति संसाधनों के समान अधिकारों के बिना लैंगिक समानता हासिल नहीं की जा सकती है, आज भी हमारा समाज पुरुष प्रधान है, आज भी हमारा समाज पुरुष प्रधान है। इसके अलावा, अपने पिता या पति की पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है, पति या पिता के नाम के बिना, महिला समाज एक महिला को स्वीकार नहीं करता है। जो आज भी हमारे रीति-रिवाजों और कानूनों को अधिकार देगा, वह महिलाओं को अधिकार देने में संकोच करता है। समाज में महिलाओं का काम सिर्फ घर चलाना है, बच्चे का जन्म सिर्फ दो काम हैं जिन्हें अधिक शुद्धता दी जाती है और समाज में एक महिला समाज से अधिक घृणित है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से मोबाइल वाणी के माध्यम से ग्राम मौज भवानीपुर के स्थानीय निवासी जमुना प्रसाद बता रहे हैं कि गाजीपुर के भवानीपुर में पानी टंकी की सुविधा नहीं मिलने से परेशान है जनता और मनरेगा में काम नहीं मिलने से लोग समस्या से परेशान हैं। राशन कार्ड और बिजली की भी व्यवस्था नहीं है
