उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्जापुर जिला से मुन्नालाल मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानना चाहते हैं कि क्या दिव्यांगों के लिए भी कोई योजना चलायी जा रही है ,इसके बारे में बताया जाए
विवाह को जन्म और जन्म के बीच का संबंध माना जाता है। विवाह वह संबंध है जिसमें लड़का और लड़की अपना पूरा जीवन एक-दूसरे के साथ बिताते हैं, न केवल लड़का और लड़की बल्कि दोनों परिवार भी अपनी शादी से एकजुट होते हैं। अगर आप अपने जीवनसाथी के बारे में पहले से नहीं जानते हैं तो आपको शादी करने से पहले उनके बारे में पता होना चाहिए। हालाँकि पति और पत्नी के पास धीरे-धीरे एक-दूसरे को जानने और एक-दूसरे के जीवन के अनुकूल होने के लिए बहुत समय होता है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण चीजें हैं जो शादी है। यदि आप पहले से ही अपने जीवनसाथी के बारे में चीजें जानते हैं, तो यह समझना आसान होगा कि क्या आप दोनों एक-दूसरे के लिए अच्छे हैं। यदि आवश्यक हो, तो लड़के या लड़की दोनों को शादी से पहले अपने भावी जीवनसाथी से यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या शादी उसकी पसंद है.
यह नौकरी उन लोगों के लिए है जो भारतीय डाक सर्किल द्वारा निकाली गयी ब्रांच पोस्ट मास्टर, असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर, एवं डाक सेवक के पद पर कार्य करने के लिए इच्छुक हैं। तीनों पदों पर कुल 44,228 रिक्तियां निकाली हैं। इन पदों के लिए मासिक वेतन 10,000 से 30,000 रूपए रखा गया है। वैसे उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिक पास किया हो।साथ ही आवेदन कर्ता की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इन पदों के लिए आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के लिए 100 रूपए तथा आरक्षित वर्ग एवं महिलाओं के लिए निशुल्क रखा गया है। इच्छुक उम्मीदवार को अपना आवेदन ऑनलाइन भरना होगा। अधिक जानकारी के लिए आवेदन कर्ता इस वेबसाइट पर जाकर जानकारी ले सकते हैं, वेबसाइट है www.indiapostgdsonline.gov.in/आवेदनकर्ताओं का चयन मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जायेगा। याद रखिये आवेदन करने की अंतिम तिथि 05/08/2024 है।
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बनारस रेल इंजन कारखाना में स्वास्थ्य केंद्र में वृक्षारोपण कर एक पेड़ मां के नाम लगाओ अभियान की शुरुआत की गई इस अवसर पर कई स्कूलों के द्वारा वृक्षारोपण किया गया और जिस प्रकार से हर व्यक्ति के जीवन में मां का महत्वपूर्ण योगदान होता है उसी प्रकार हम पर्यावरण के प्रति भी समर्पित भाव से पौधारोपण के माध्यम से कर रहे हैं इसके साथ ही वृक्षारोपण कार्यक्रम के लिए लोगों को जागरूक किया गया और कहां गया कि वृक्षारोपण करो मानव जीवन बचाओ और लोगों को यह संदेश दिया गया कि वृक्षारोपण कर धरती को हरा-भरा बनाएं जिससे आने वाली समस्याओं और रोगों से बचा जा सके तो वही इसके साथ यह संदेश भी दिया गया कि पेड़ लगाए ही नहीं बल्कि उसका संरक्षण करें
आज देखा जाए तो पर्यावरण तेजी से परिवर्तित हो रहा है। आने वाले समय में इसका दुष्परिणाम हो सकता है। पर्यावरण अगर संतुलित रहेगा तो आने वाली समस्या अपने आप ही रास्ता बना लेगी अगर सभी लोग पेड़ पौधे लगाए तो आने वाली समस्याओं से हम बच सकते हैं। जिससे मानव शरीर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी इसके साथ ही हम सभी लोगों की यह जिम्मेदारी होती है। कि पेड़ लगाना ही नहीं उसे बचाना हमारा प्राथमिकता होना चाहिए
उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से से आकांक्षा श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रत्येक लड़के और लड़की के समग्र विकास में तेजी से प्रगति होनी चाहिए प्रत्येक बच्चे को अपनी क्षमता का एहसास करने का अधिकार है वे लैंगिक असमानता के दुष्चक्र के साथ-साथ भारत में लड़कियों और लड़कों के बीच लैंगिक असमानता के कारण ठीक से नहीं पनपते हैं, न केवल उनके घरों और समुदायों में बल्कि हर जगह लिंग असमानता दिखाई देती है। जैसा कि पाठ्यपुस्तकों में परिलक्षित होता है। फिल्में, मीडिया आदि, हर जगह उनके संबंधों के आधार पर भेदभाव किया जाता है, न केवल देखभाल करने वाले पुरुषों और महिलाओं के साथ भी भेदभाव किया जाता है, भारत में लैंगिक असमानता भी अवसरों में असमानता पैदा करती है जो दोनों लिंगों को प्रभावित करती है लेकिन आंकड़ों में प्रतिबिंबित नहीं होती है।
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा नींबू के फसल के बारे में जानकारी दे रहे हैं। विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
उत्तर प्रदेश राज्य से अमित शर्मा मॉविले वाणी के माध्यम से बता रहे है कि मानव जाति के लिए यह चेतावनी है कि कुदरत का अंधा धुंध दोहन बंद कर अपनी विलासिता पूर्ण जिंदगी पर लगाम लगाए ताकि वातावरण के तापमान को नियंत्रित किया जा सके। जिससे हम ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से बच सकें। अप्रत्याशित मौसम बदलाव का असर जहां हमारी खाद्य सुरक्षा को जोखिम में डाल रहा है, वहीं तमाम तरह की बीमारियों को भी जन्म दे रहा है।
