"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा धान की सीधी बुवाई तकनीक से होने वाले कई लाभ के बारे में जानकारी दे रहे हैं। विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

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दोस्तों, एक बार फिर से उन्हीं दिनों को जीने की कोशिश करते हैं अपने बच्चों के संग उनके बचपन को एक त्यौहार की तरह मनाते हुए हंसते हुए, खेलते हुए, शोर मचाते बन जाते हैं उनके दोस्त और जानने की कोशिश करते हैं इस बड़ी सी दुनिया को उनकी आंखों से | घर और परिवार ही बच्चों का पहला स्कूल है और माता पिता दादा दादी और अन्य सदस्य होते हैं उनके दोस्त और टीचर हो. साथ में ये भी कि बच्चों के दिमाग का पचासी प्रतिशत से अधिक विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है.

उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से से आकांक्षा श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत एक और जहाँ आर्थिक और राजनीतिक मार्ग की ओर बढ़ रहा है, देश में लैंगिक असमानता अभी भी गंभीर बनी हुई है। सदराज सांग ने वैश्विक स्तर पर भी लैंगिक असमानता को समाप्त करने में सैकड़ों साल लगने की संभावना व्यक्त की है। इन परिस्थितियों के आलोक में, अमेरिकी राजनेता हेनरी क्लिंटन ने कहा कि महिलाएं दुनिया में सबसे अधिक अप्रयुक्त संसाधन हैं। इस समाज की प्रगति का स्तर यहीं है। परिणामी विकास नहीं होना चाहिए, समाज के विकास का विरोध करने वाले सभी व्यक्तियों के माध्यम से उस वर्ग को शामिल किया जाना चाहिए। इस परिदृश्य में नए विकास के लोगों ने भारतीय समाज के विकास की नई परिभाषा में वित्तीय, सामाजिक और राजनीतिक समावेश को भी आत्मसात किया।

उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडे ने मोबाइल वाणी के माध्यम से कोमल से बातचीत की। महिलाएं अभी भी गाँव में पिछड़ी हुई हैं। अगर उन्हें कहीं जाना है, तो वे माँ और पिता की अनुमति के बिना नहीं आ सकते। वे अपने दम पर कोई निर्णय नहीं ले सकते। अगर महिलाओं को जमीन मिलती है, तो वे अपना भविष्य बना सकती हैं, वे अपने बच्चों का भविष्य बना सकती हैं,अगर महिलाओं को जमीन मिल भी जाये तो पुरूष उन पर विश्वास नहीं करते। विश्वास की कमी के कारण पुरुष जल्द ही उनके नाम पर नहीं करते हैं , लड़कियाँ को पढ़ेंगे और लिखेंगे, तभी उन्हें अपने अधिकारों का पता चलेगा।

पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पेड़ पौधे लगाना बहुत जरूरी है पेड़ पौधे हमारे जीवन का आधार है लिए हम सब मिलकर अपने पृथ्वी को हरा-भरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध हो इसके साथ ही पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को ऑक्सीजन की कमी ना हो इसके लिए हमें पृथ्वी को हरा-भरा रखना जरूरी है

बीएचयू परिसर में पेड़ों के सूखे पत्ते अब हरियाली के वाहक बनेंगे। विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग ने सूखे पत्तों को जलाने के बजाए उनसे जैविक खाद बनाने की पहल की है। इस खाद का इस्तेमाल बीएचयू के उद्यान और पौधों में तो होगा ही, उसे शहर की पौधशालाओं और - पर्यावरण प्रेमियों को सस्ती दर पर बेचा भी जाएगा। बीएचयू की जैविक खाद जल्द ही बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। बीएचयू में मौजूदा समय में पेड़- पौधों की 650 से ज्यादा प्रजातियां हैं। पहले उन पेड़-पौधों के सूखे पत्तों को बटोर कर जलाया या गड्ढे में दबा दिया जाता था। बीएचयू के उद्यान प्रभारी प्रो. सरफराज आलम ने बताया कि भारी मात्रा में निकलने वाले इन पत्तों से जैविक और वर्मी कंपोस्ट तैयार कराई जा रही है। उच्च क्वालिटी की इस जैविक खाद का इस्तेमाल बीएचयू के विभिन्न उद्यानों, पार्क और नए लगे पौधों में किया जाएगा। कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित उद्यान, स्विमिंग पूल के पीछे नेहरू पार्क, छित्तूपुर रोड के बगल में खाली स्थान के अलावा कई जगहों पर गड्ढे बनाए गए हैं। एक मीटर गहराई वाले इन गड्डों में पत्ते डालकर उन्हें जैविक प्रक्रिया से कंपोस्ट में बदला जा रहा है। खाद तैयार होने में डेढ़ से दो महीने का समय लगता है। इसी तरह वर्मी कंपोस्ट भी अलग तैयार हो रहा है।

सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की समझ बढ़ा सकते है।ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? क्या आपके पास भी कोई नन्ही कहानी है? हमें बताइए, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे पैसों के सही निवेश के बारे में अपने श्रोताओं की राय

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