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बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला के संगम सीएलएफ से एनआरपी की पद पर कार्यरत विनीता मोबाइल वाणी के माध्यम से किचन गार्डेन अर्थात पोषण वाटिका के बारे में बताना चाहतीं है,कि इससे क्या क्या लाभ है। बाजार से साग सब्जियां खरीदने में कितना घाटा होता है ,साथ ही अनेक प्रकार की दवाईयां मिली होती है और पैसे भी लगते हैं,इससे अच्छा है कि अपने घर पर ही सब्जी उगायें और जिनके पास ज़मीन नहीं है, वो अपने घर के छत पर सब्जी उगायें जैसे बोरे में या बाल्टी में जो भी सुविधा की चीज़ मिल जाये उस में उगाया जा सकता है। इस प्रकार से अपने घर में खुद की उगाई सब्जी को खा सकते हैं और बीमारी से बचा भी जा सकता है।

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कहते हैं वक़्त एक जैसा कभी नही होता, अगर वक़्त खराब है तो ऐसे वक्त में आप खुद के हौसले से अपना वक़्त बदल सकते हैं। ऐसा ही कुछ किया रेणु दीदी के ने। आज कामयाब दीदियों की कहानी इस कड़ी में आइए मिलते है उनसे और जानते है कैसे उन्होंने अपना वक़्त बदला। ऑडियो पर क्लिक कर सुने पूरी बात।

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मुजफ्फरपुर : बच्चों के लिए टीकाकरण उतना ही जरुरी है जितना उनके बेहतर भविष्य की कल्पना करना। टीकाकरण विभिन्न गंभीर बीारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस संबंध में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ ए.के पांडेय कहते हैं - जिस बच्चे का टीकाकरण न होता है, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास नहीं हो पाता, जिस कारण वह अत्यधिक बीमार हो सकता है, स्थायी रुप से अक्षम, कुपोषित और जान पर भी बन सकती है। एक बच्चा जिसे इंजेक्शन या दवा पिलाई गई हो टीकाकृत माना जाता है।

संतोष कुमार मंडल , मुज़फ़्फ़रपुर :- बिहार बोर्ड की इंटर परीक्षा में वर्ष 2022 शामिल होने वाले 11वीं के छात्र अब पांच नवंबर तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो को किलिक करें।

मुजफ्फरपुर : लॉकडाउन के शुरुआती समय से ही जब हम और आप अपने घरों में महफूज थे, उस वक्त आशा कार्यकर्ताओं ने कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में जो हौंसला दिखाया। वह अपने आप में एक मिसाल है। संदिग्ध लक्षणों वाले लोगों और प्रवासियों की खोज से लेकर गर्भवतियों और गंभीर रोगियों की पहचान तक आशा कार्यकर्ताओं द्वारा की गयी। वहीं होम आइसोलेशन के दौरान भी लोगों को उचित सलाह और निरंतर देख-रेख में आशा का ही सहारा लिया गया।

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बिहार राज्य के जिला मुज़फरपुर से जुल्फिकार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि 15 अक्टूबर को मनाया जाता है ग्लोबल हैण्ड वाशिंग डे। कोविड संक्रमण के दौरान मास्क के इस्तेमाल के साथ हाथों की नियमित साफ सफाई रखने पर भी जागरूकता बढ़ी है. साबनु पानी से 40 सेकेंड तक हाथों को धोना या इनकी उपलब्धता नहीं होने पर सैनिटाइजर के इस्तेमाल के प्रति लोग सचेत नजर आ रहे हैं. हाथों की साफ-सफाई रखने को लेकर राज्य में यूनिसेफ द्वारा भी अभियान चलाया गया है।