दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से रीना परवीन की बातचीत फलक से हुई फलक बताती हैं मेरे पापा फैक्ट्री में काम करते हैं और वह ऐसी जगह पैसे नहीं लगाते हैं क्योंकि पैसे बचते ही नहीं हैं तो लगाएंगे कहां से वैसे भी आजकल कंपनियां या तो भाग जाती है या फिर फ्रॉड कर देती हूं जिसकी वजह से गरीब आदमी का पैसा डूब जाता है जैसे सहारा कंपनी में हमारे भाई ने पैसे लगाए थे हर महीने किस्त जमा करते थे वह कंपनी डूब गई हमारे पैसे भी डूब गए अब हमारा नुकसान कौन देगा इस वजह से हमारे पिताजी किसी भी कंपनी में अपने पैसे नहीं लगाते हैं और मैं तो यही कहूंगी लगाने भी नहीं चाहिए