दिल्ली, गुरुराम रोड से नन्द किशोर श्रमिक वाणी के माध्यम से एक सब्ज़ी विक्रेता से बात कर रहें हैं। सब्ज़ी विक्रेता राकेश का कहना है कि, जब से इन्होने होश संभाला है तब से पहली बार है की चैत के महीना यानी मार्च अप्रैल में कम्बल ओढ़ना पद रहा है। बिना मौसम की बारिश हो रही है। तथा इनका कहना है की यदि ये पचास किलो टमाटर लाते हैं तो कुछ बिकता है और बचा हुआ टमाटर दिन में गर्मी के बाद शाम में बारिश और रात में ठंढ के कारण खराब हो जाता है तो मजबूरन इन्हें बचे हुए सब्ज़ी को फेंकना पड़ता है। जिस कारण बिमारी तो फैलती ही है और सब्ज़ी विक्रेता का नुकसान तो हो ही रहा है.