दिल्ली के मानेसर से मनीष कुमार ने श्रमिक वाणी के माध्यम से राज कुमार यादव से बातचीत किया। बातचीत के दौरान राज कुमार यादव ने बताया की, इन्होने एक संस्था से 60 हज़ार रूपए का लोन लिया था, उस लोन पर इन्हे 5 प्रतिशत का ब्याज देने बोला गया था। लेकिन अचानक बिना बताए संस्था के द्वारा 5 प्रतिशत ब्याज को बढ़ा कर 10 प्रतिशत कर दिया गया। राज कुमार ने जब 10 हज़ार रूपए कर के अपना लोन जमा करने को कहा तो कंपनी के द्वारा इन्हे कहा गया कि आप 10 हज़ार रूपए कर के पैसा नहीं दे सकते है 30 हजार रुपए कर के पैसे जमा कीजिए और इसके साथ ब्याज भी जमा कीजिए।
