दिल्ली एनसीआर के कापसहेड़ा से नन्द किशोर साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक रमाकांत से बात कर रहे हैं। रमाकांत का कहना है कि वो जिस किराया के मकान में रहते है वह सप्लाई पानी आता है जो बिलकुल भी पिने लायक नहीं होता है। साथ ही कह रहे है कि पानी में कीटाणु होते है इसलिए लोग पानी का स्तेमाल सिर्फ कपडे धोने और नहाने में ही किया करते हैं। आगे कह रहे है कि उन्हें पिने के लिए पानी 20 रूपए में खरीद कर पीना पड़ता है और इसी तरह हर महीने में लगभग 30 बॉटल पानी खरीदना पड़ता हैं
