दिल्ली एनसीआर से नन्द किशोर साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से मेरा मुखिया कैसा हो कार्यक्रम के तहत कह रहे है कि शाशक और प्रशाशक में फर्क होता है। शाशक को हर पांच वर्षों में कम से काम एकबार अपने कार्यकलापों और उपलब्धियों को लेकर जनता के शामाक्ष जाना होता है।
