दिल्ली से हस्मत अली ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत आर्थिक रूप से प्रगति कर रहा है। देश में अरबपतियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है ,तो दूसरी तरफ देश का एक तबका भीख मांगकर पेट भरने को मजबूर है। भिक्षा आधुनिक भारत के माथे पर कलंक है। मंदिर ,मस्जिद या किसी भी धार्मिक स्थल पर भीड़ लगी रहती है। कोई भी कुछ भी देने को आगे बढ़े तो सभी उस पर टूट पड़ते हैं। हजारों लोग वास्तव में दो वक्त की रोटी का प्रबंध करने के लिए ऐसा करते हैं, तो अन्य लोगों ने इसे पेशा बना रखा है। कई बार ऐसी खबरें मिलती रही है कि सड़क किनारे भीख मांगने वाला लाखों का बैंक खाता छोड़ गया। भीख मांगने वाली अपने पीछे लाखों की संपत्ति छोड़ गई। लेकिन हम अस्पतालों ,रेलवे स्टेशनों ,बस अड्डों ,चौराहें या अन्य स्थलों पर भीख मांगती महिला और बच्चे को देखते हैं तो सोचने को विवश होते हैं। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
