दिल्ली से राजेश कुमार पाठक साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से रंजीत कुमार जी के द्वारा कही गयी बात से सहमति व्यक्त करते हुए उनकी तारीफ़ कर रहे हैं और सभी श्रमिक भाईयों से अपने अधिकार के लिए संगठित होकर लड़ने की बात कर रहे हैं। कम्पनियों के पास ही खुलने वाली शराब की दुकानों से श्रमिकों का पैसा और सेहत दोनों बर्बाद होती हैं।