धरहरा : एक तरफ जहां सरकार गांव को भी शहरों की भांति स्वच्छ बनाने के लिए प्रखंड अंतर्गत सभी पंचायतों के सभी वार्डों में स्वच्छता कर्मी की नियुक्ति कर रही है तथा स्वच्छता कर्मी भी सरकार के निर्देशानुसार वार्ड के प्रत्येक घरो में जाकर घरों से गीला कचरा एवं सूखा कचरा को एकत्रित कर उन कचरो को पंचायत में बने कचरा प्रबंधन सेड में जमा करते है जिससे कि उन अवशिष्ट कचरो का रि-साइक्लिंग हो सके तथा सरकार का "स्वच्छ बिहार स्वास्थ्य बिहार" का सपना पूरा हो सके। इसके लिए लिए सरकार ने लाखों रुपए की खर्च कर पंचायत के प्रत्येक घरों में डस्टबिन का वितरण किया किंतु अब पंचायत में स्वच्छता कर्मियों को मानदेय राशि नहीं मिलने से ईटवा पंचायत के स्वच्छता कर्मियों ने संबंधित पंचायत में काम करना बंद कर दिया है जिससे सरकार का गांव को शहरो की भांति स्वच्छ बनाने का सपना अंधेर में लटक गया है। ईटवा पंचायत में कार्यरत स्वच्छता कर्मी प्रीतम मिश्रा, गौतम कुमार, छोटू कुमार, कन्हैया कुमार सहित अन्य ने बताया कि वह लोग विगत 8 महीने से संबंधित पंचायत में सफाई कर्मी का काम नियमित रूप से कर रहे हैं किंतु 8 महीना भी जाने के बाद भी है अब तक उनको मानदेय राशि नहीं दी गई है।