*मगही को 8वीं अनुसूची में शामिल करने हेतु आंदोलन की है आवश्यकता।* विराट हिन्दुस्तान संगम के तत्वावधान में 41वें वेबिनार पर मगही के इतिहास एवं वर्तमान स्थिति पर वक्ताओं ने कहा। बिहार की भाषाओं एवं बोलियों पर संवाद श्रृंखला की दूसरी कड़ी में रविवार को विराट हिंदुस्तान संगम के तत्वावधान में मगही का इतिहास, वर्तमान स्थिति, चुनौतियां एवं समाधान विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। यह संस्था द्वारा आयोजित 41वीं वेबिनार थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आंदोलन के प्रणेता प्रोफेसर डॉ. रामानंद प्रसाद सिन्हा ने मगही को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए जन आंदोलन छेड़ने और सतत प्रयत्न करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और लोकसभा के संपादक रणविजय राव ने घर परिवार को मगही में बातचीत करने पर जोर देते हुए कहा कि जब तक युवाओं को इसमें सम्मिलित नहीं करेंगे मगही अपनी मंजिल नहीं पा सकेगी। संस्था के अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र प्रसाद सिंह ने गोष्ठी के उद्देश्यों और संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिना विवाद पैदा किए बिहार की सभी भाषाओं और बोलियों का समन्वय स्थापित करने की जरूरत है। मुख्य वक्ता और मगही अकादमी के पूर्व सदस्य उदय भारती ने मगही के इतिहास पर प्रकाश डाला और बताया कि भगवान बुद्ध के समय काल से भी मगही पुरानी है उन्होंने मगधी से मगही की यात्रा को विस्तार से बताया। राजकुमार प्रसाद ने बताया कि मगही बिहार से सटे चार राज्यों और कई देशों में बोली जाती है। उन्होंने मगही के विकास में ग्रियर्सन के योगदान की भी चर्चा की। कार्यक्रम में वक्ता डॉ अशोक प्रियदर्शी ने मगही को राज्य की दूसरी भाषा बनाने पर जोर दिया और कहा कि पड़ोसी झारखंड में यह दर्जा मगही को मिल चुका है। कार्यक्रम का संचालन एनडीटीवी के पत्रकार डॉ प्रमोद कुमार प्रवीण ने किया। 2 घंटे से ज्यादा चले इस गोष्ठी में गीतकार नरेंद्र सिंह नेगी ने कोरोना पर मगही गीत गाया। उनके अलावा नवनीत कृष्ण, अंजनी कुमार सुमन और रंजीत दुद्धु ने भी गीत और कविता पाठ किये।धन्यवाद ज्ञापन डॉ वीरेंद्र कुमार ने किया।