ढ़ह गया संस्कार भारती का एक स्तंभ, सोशल मीडिया पर छाई शंकर मेहता का निधन की खबर। जमालपुर। जिले में कलाकारों की मौत से अब सुनामी भी घबरा गया और शुक्रवार की सुबह शंकर मेहता की मौत के बाद ये खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ इसके साथ ही संस्कार भारती का एक किला ढ़ह गया क्योंकि मुंगेर संस्कार भारती के प्रमुख कलाकार थे।इसके साथ ही शंकर मेहता ह्रदय जीवित हैं तथा लाल मंजन निर्माता थे।जो निर्माणधीन दंत मंजन पूरे जिले में सफ्लाय करते थे। संस्कार भारती के महेश अंजाना ने बताया कि श्री मेहता का ह्रदय गति रुकने से मौत हो गई। मधुर आवाज़ के मालिक तो थे ही मृदुल स्वभाव के मिलनसार इंसान थे।वे कई नाटकों में अभिनय कर चुके शंकर मेहता ने अपनी संजीदगी से सबके दिलों में जगह बनाई थी। नाटकों की अंतिम यात्रा संस्कार भारती सह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा संचालित 'गंगा नमामि अभियान' में महेश 'अनजाना' लिखित नुक्कड़ नाटक "क्यों गंगा मैली हो गई" में सुन्दर अभिनय और गायन करते हुए पुरी की। जानिसा आर्ट एंड फ़िल्म स्टूडियो, जमालपुर में उद्घोषक भी थे। उन्होने संस्कार भारती, मुंगेर इकाई के संगीत विधा और नाट्य विधा के दायित्वों को बखूबी निभाया। इनकी मृत्यु से सभी संगीत प्रेमियों में उदासी के बादल छा गए हैं।इस घटना के बाद कलाकार जगत म़े शोक की लहर दौड़ पड़ी कलाकारों ने गहरा दुख प्रकट एवं श्रद्धाजंलि अर्पित की। तबला वादक गिरीन्द्र चंद्र पाठक,विजय विशवकर्मा, महेश अंजाना, ईशा चंचल,संजीव कुमार, गंगा रजक,इम्तियाज आलम,रघुवीर प्रसाद,कंचन शर्मा,दीपू था सहित अन्य कलाकारों बुद्धजीवियों ने संवेदना प्रकट की हैं।
