• स्वास्थ्य मंत्री ने 37 ट्रू-नेट मशीन का किया लोकापर्ण • निक्षय पोषण योजना के सुदृढ़ीकरण के लिए आईवीआरएस के पायलट की शुरुआत • राज्य के टीबी अस्पतालों में रिक्त पदों पर होगी बहाली पटना/ 24, मार्च: हर वर्ष 24 मार्च विश्व यक्ष्मा दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष के विश्व टीबी दिवस की थीम ‘द क्लॉक इज टीकिंग’ रखी गयी है. यह थीम सही अर्थों में तात्कालिकता को दर्शाता है और टीबी को खत्म करने के वादों को पूरा करने के लिए विश्व के पास कम समय शेष होने का बोध कराता है. अधिक से अधिक टीबी रोगियों की पहचान एवं उनके ईलाज में सभी का सहयोग टीबी उन्मूलन का मूलमंत्र है. उक्त बातें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने बुधवार को शहर के एक होटल में विश्व यक्ष्मा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही. 37 ट्रू नेट मशीन का लोकापर्ण: कार्य्रकम की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय सहित राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार एवं अपर कार्यपालक निदेशक अनिमेष पराशर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर की. साथ ही मंगल पाण्डेय ने राज्य के लिए 37 ट्रू-नेट मशीन का लोकार्पण और निक्षय पोषण योजना के सुदृढ़ीकरण के लिए आईवीआरएस के पायलट की शुरुआत की. इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री सहित राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार अन्य विशिष्ट पदाधिकारियों ने राज्य के टीबीफैक्ट शीट का भी विमोचन किया. वर्ष 2025 तक लक्ष्य करना है प्राप्त: इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि टीबी वर्तमान में सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताओं में से एक है. भारत में टीबी के मामले विश्व में सबसे अधिक है. पूरे विश्व की तुलना में भारत में 27% टीबी के मरीज हैं. वहीं टीबी के कारण देश में प्रत्येक साल 4 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है. इस दिशा में मजबूत इच्छाशक्ति और संकल्प दिखाते हुए माननीय प्रधानमंत्री ने भारत को वर्ष 2025 तक टीबी से मुक्त करने के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की है, जिसे वैश्विक लक्ष्य से पांच साल पहले ही राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत प्राप्त करने का लक्ष्य है. उन्होंने बताया इसको लेकर बिहार में भी कई प्रयास किये जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि टीबी रोगियों की प्रभावी पहचान के लिए राज्य भर में 70 सीवी-नेट मशीन हैं एवं अब 37 ट्रू-नेट मशीन भी राज्य को उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से मेडिकल कॉलेज तक टीबी रोगियों की जाँच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है. साथ ही टीबी अस्पतालों में मानव संसाधन की कमी हो पूरा करने के लिए सभी एसटीएस एवं एसटीएलएस के खाली पदों पर नई नियुक्ति जल्द ही पूरी कर ली जाएगी. उन्होंने कहा कि टीबी रोगियों के नोटिफिकेशन को बढ़ाने के लिए किसी आम व्यक्ति, निजी अस्पतालों एवं प्रैक्टिसनर को टीबी रोगियों की जानकारी देने पर 500 रूपये एवं उनके दवाओं के कोर्स खत्म होने पर पुनः 500 रूपये की प्रोत्साहन राशी भी दी जा रही है. साथ ही एमडीआर-टीबी के नोटिफिकेशन में 1500 रूपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. वहीँ टीबी रोगियों के उनके ईलाज के दौरान उनके बेहतर पोषण के लिए प्रति माह 500 रूपये की धनराशि भी दी जा रही है.