मुंगेर, 09 फरवरी | सही समय पर सही जगह टीबी कि जांच, बेहतर इलाज और दवाओं के नियमित इस्तेमाल करने के बाद टीबी की बीमारी लाइलाज नहीं है। उक्त बातें टीबी बीमारी पर जीत हासिल कर चुके मुंगेर जिला मुख्यालय के घोषी टोला निवासी पवन कुमार ने कही। पवन कुमार आईसीआईसीआई बैंक के अधिकृत ग्राहक सेवा केंद्र में काम करने के साथ ही फोन पे के क्यू आर कोड बनाने का काम करता है। उन्होंने बताया कि वो अभी एक राजनीतिक पार्टी से भी जुड़े हैं | उन्होंने बताया कि सन 2017 में खांसी की परेशानी शुरू हुईं तो मैंने समझा कि साधारण खांसी है| थोड़ी बहुत दवा लेने के बाद ठीक हो जाएगी। इसके बावजूद खांसी ठीक नहीं हुई| यह दौर लगभग पांच- छह महीने तक चलता रहा। अक्टूबर- नवंबर के मौसम में अपने किसी रिश्तेदार की शादी में बारात गया हुआ था। वहां से लौटने के बाद मुझे तेज खांसी होने लगी और उसके साथ उल्टी भी शुरू हो गई। साथ ही उल्टी के साथ खून भी आने लगा। तब मेरे परिवार वालों ने तत्काल इलाज करने के लिए पास में रहने वाले कंपाउंडर को बुलाया तो उन्होंने अपनी जानकारी के अनुसार इलाज शुरू की। इसके बाद मैने मुंगेर के नामी- गिरामी प्राइवेट डॉ सुनील कुमार, डॉ. राम प्रवेश और डॉ. केके वाजपेयी के यहां बारी- बारी से अपना इलाज करवाया। इसके बावजूद किसी भी डॉक्टर को मेरी परेशानी के सही कारणों का पता नहीं चल पाया। इसके बाद मैंने मुंगेर के ही डॉ प्रभाकर सिंह से मिल कर अपनी परेशानी बताई तो उन्हें भी सन्देह हुआ कि क्या वजह है कि टीबी का इलाज चलने के बाद भी बीमारी समझ में नहीं आ रही है। बीमारी ठीक नहीं हो पा रही है| कहीं इसे टीबी का विकृत स्वरूप तो नहीं हो गया है। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
