बेरोकटोक चल रही जुगाड़ गाड़ी जिले की सड़कों पर वाहनों की जांच के नाम पर बाइक सवार के हेलमेट की खोज परिवहन विभाग के साथ पुलिस भी करती है।लेकिन सड़कों पर काला धुआं उगलने वाले वाहनों पर इनकी नजर नहीं जाती है। करीब 17 लाख की आबादी वाले मुंगेर जिले में पांच हजार से अधिक जुगाड़ वाहन का परिचालन हो रहा है। जिससे निकलने वाला काला धुआं न सिर्फ शहर के साथ-साा ग्रामीण इलाकों को भी प्रदूषित कर रहा है, बल्कि लोगों के बीच बीमारी भी बांट रहा है। प्रतिबंध के बावजूद जुगाड़ गाड़ी सड़कों पर काला धुआं उगलते दौड़ लगा रही है। इस तरह जहरीली हवा के बीच लोग जीने को मजबूर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य परिवहन आयुक्त ने भी एक पत्र जारी किया पत्र के आधार पर एक बड़ा फैसला लिया गया। इसके अनुसार जिले में सभी प्रकार के जुगाड़ गाड़ी जो डीजल पंप सेट, मोटर साईिकल हैंडल, माल ढोने वाला रिक्शा-ठेला के समायोजन द्वारा निर्मित है। इस तरह के जुगाड़ गाड़ी से क्रमश: अवैध रूप से परिचालन और व्यवसायिक सामान गिट्टी, सीमेंट, लकड़ी के अलावा रोज अलग-अलग सामान को ढोने उपयोग कर रहे हैं। इस तरह के वाहन मोटर वाहन अधिनियम 1988 बिहार मोटर नियमावली 1992 और केन्द्रीय मोटर नियमावली 1989 के किसी भी मानको को पूरा नहीं करता है। इस तरह के वाहनों के प्रोटोटाइप की भी मंजूरी नहीं मिलती है। जिसके कारण इन वाहनों का निबंधन, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं मिलता है। दुर्घटना के फलस्वरूप यात्री और वाहन को क्षतिपूर्ति का भुगतान नहीं किया जा सकता है। विभाग ने सभी आरटीए, डीटीओ, एमवीआइ व प्रवर्तन अवर निरीक्षकों को जुगाड़ गाड़ी के परिचालन पर रोक लगाने को कहा है।
