मुंगेर जिले में शिक्षा विभाग की स्थिति ये हो गई है कि शिक्षक के कटघरे में शिक्षा विभाग आ गया है। जो एक गंभीर मामला है। समस्याओं से घिरे शिक्षक के लिए संघ भी अब हाय तौबा मचा रही है।भ्रष्टाचार की स्थिति ये हुई है कि संघ की बात को भी अफसरान दरकिनार कर देते हैं और संध भी अफसरों और सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया है। जिससे शिक्षक के कटघरे में सरकार और शिक्षा विभाग आ गया है। जो एक गंभीर और संगीन मामला है। बता दूं कि आंदोलन को लेकर मुखर हुए शिक्षक अब दम तोड़ने लगे हैं और आगे विधानसभा चुनाव है। इसकी भी जरा सी परवाह शिक्षक और सरकार को नहीं हैं। जबकि हजारों शिक्षकों को चुनाव का ट्रेनिंग देना आरंभ हो गया है। विडंबना है कि जो शिक्षक चुनाव कार्य करके बड़े-बड़े नेता बना देते हैं। आज उनकी समस्या का अंबार खड़ा है। 01 जनवरी 2016 को लेकर शिक्षकों का पुर्न वेतन निर्धारण का आदेश हुआ था। जिसको लेकर डीपीओ स्थापना द्वारा वेतन संधारण किया जाना है। आज तक शिक्षकों का वेतन संधारण नहीं हुई है। जिसके सिक्के खनके वैसे शिक्षकों का वेतन संधारण हो गया। जिसके सिक्के नहीं खनके वो संघ के शरण में है। इस संदर्भ में जिला माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव वकील राम ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर कहा कि सरकार शिक्षकों के प्रति संवेदनहीन एवं उदासीन बनी है। सरकार शिक्षकों की समस्याओं को ससमय निष्पादन कराने में सक्षम नहीं हैं। शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी डीपीओ,डीईओ बिना पैसे लिये फाईल आगे बढ़ता नही हैं। जिसके कारण सेवानिवृत्त शिक्षकों को ससमय पेंशन,वेतन का भुगतान या संधारण नहीं हो पाता है।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
