श्मशान घाट में डोम के मनमानी पर लगे रोक -राजद पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा हरिश्चंद्र जब अपनी राज पाट दान कर दिए तो उन्हें डोम के यहां नौकरी करनी पड़ी थी।वे नित्य प्रतिदिन श्माशन घाट में शव जलाने वाले से अग्नि देने के बदले पैसा वसूलता था । कहा जाता है कि जब उनका पुत्र की मृत्यु हुई थी तो वे अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपनी पत्नी से भी आग देने के बदले श्मशान घाट में पैसा वसूला था ।तब से आज तक हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मृत शरीर का दाह संस्कार करने के पूर्व श्मशान घाट पर डोम से आग लेने की परंपरा रही है।पर आग देने की नाम पर डोम द्वारा मोटी रकम वसूला जाता है जो मानवता को शर्मसार करती है। इस कुरीति के विरोध में जिला राजद के उपाध्यक्ष सह राज्य परिषद सदस्य प्रो विनय कुमार सुमन, जिला राजद प्रवक्ता बमबम राय ,जिला महासचिव श्रीकांत यादव ,छात्र राजद के पूर्व जिला अध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता, पंचायती राज के जिला अध्यक्ष विजय कुमार यादव ने संयुक्त बयान जारी कर जिलाधिकारी मुंगेर से यह मांग किया है कि आग देने के नाम पर जबरदस्ती मोटी रकम उगाही पर तत्काल रोक लगाई जाए। विगत दिन पत्रकार सुनील जख्मी के भाई अजय तांती के मृत्यु उपरांत परिवार के लोग वैसे ही गम में डूबे थे और जब शव का दाह संस्कार करने श्मशान घाट पहुंचे तो डोम ने दो लाख लेने के बाद ही आग देने के नाम पर अड़ गए।ऐसी घटना सिर्फ सुनील जख्मी के साथ ही घटी ऐसी बात नहीं है बल्कि हर रोज दाह संस्कार के क्रम में शव के परिवार वालों के साथ डोम की झड़प होना आम बात है ।अमीर लोग अपनी प्रतिष्ठा को देखते हुए मोटी रकम दे देता है ।पर गरीब लोग बड़ी मुश्किल से दाह संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री की जुगाड़ करते हैं। वैसी स्थिति में मोटी रकम दे पाना मुश्किल है। जिला राजद मुंगेर जिलाधिकारी से यह मांग करती है कि डोम के इस मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा एक निश्चित रकम जो गरीब भी आसानी से दे सके ।उसका निर्धारण कर रसीद कटवा कर दाह संस्कार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही ऐसी ही मनमानी सदर अस्पताल शव के पोस्टमार्टम के समय भी चीर फाड़ करने वाले के द्वारा भी की जाती है। इस पर भी जनमानस के हित को देखते हुए ध्यान दिया जाए।
