भारतीय मजदूर संघ एवं भारतीय रेलवे मजदूर संघ के आह्वान पर सप्ताहिक सरकार बचाओ उद्योग एवं रेल कर्मचारी बचाओ सप्ताह का आरंभ सोमवार को किया गया। इस अवसर पर अनेकों शॉपों में इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गये। जिससे कारखाना गूंजता रहा। यूनियन की ओर से निगमीकरण निजीकरण एनपीएस, डीए फ्रिज, श्रम कानूनों में परिवर्तन एवं पदों को सरेंडर करने को लेकर विरोध जताया गया। संचालन अमित रंजन विष्णु देव शर्मा कृष्ण प्रसाद अनिमेष कुमार ने किया तथा कौशल कुमार अरविंद कुमार मनोज कुमार नंदू राय ने मोर्चा संभाला। जुलूस स्वास्थ्य विभाग से शुरू होकर दर्जनों शॉपों में भ्रमण किया और पुनः आकर समाप्ति की गई।वित्त सचिव भानु प्रताप पाठक ने कहा कि निजी और निगमीकरण कर सरकार मुनाफा कमा रही है। कोलकाता मुंबई चेन्नई जैसे मुख्य मार्गो पर गाड़ियों का संचालन अधिक होगा जबकि दूरस्थ क्षेत्रों में कम गाड़ियों का संचालन होगा। जिससे निजी संचालकों द्वारा किराए में वृद्धि होने के कारण आम नागरिकों को रेल यात्रा में कठिनाई होगी रेलवे स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने पर पार्किंग, भोजनालय, प्रतीक्षालय के शुल्क के दरों में वृद्धि होगी और यात्रियों को अधिक भुगतान करना होगा। अस्थाई रोजगार में भारी कमी आएगी एवं बेरोजगारी की समस्या में वृद्धि होगी तथा क्रय शक्ति कम होने के कारण बाजार पर मंदी का प्रभाव पड़ेगा। विजय कुमार मंडल एवं विजय कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि निजी और निजीकरण से रेल कर्मियों के सामाजिक एवं नौकरी की सुरक्षा समाप्त होगी कर्मचारियों का शोषण होगा पास पीटीओ एवं बोनस में कटौती होगी मनमाने ढंग से कार्य का बोझ बढ़ेगा स्थानीय कर्मचारियों की जगह ठेका कर्मचारियों की वृद्धि होगी, छंटनी की संभावना बढ़ेगी । इस अवसर पर अमित रंजन एवं विष्णु देव शर्मा ने कोरोना काल में कर्मियों को डिफेंस फोर्स बताया इसके बावजूद रेलवे को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है जो उचित नहीं है कार्यक्रम में सिकंदर यादव राकेश कुमार भोला, पप्पू,समीर नितेशबाला ।ज्ञात हो कि पराए तो पराए अब अपने भी केंद्र सरकार का विरोध करने लगे हैं। इससे मोदी सरकार को सीख लेनी चाहिए और निजी एवं निगमीकरण पर रोक लगानी चाहिए बतादें कि भारतीय मजदूर संघ पूर्व रेलवे कर्मचारी संघ आरएसएस का अनुषांगिक संगठन है एवं बीजेपी सहित अन्य मातृ संगठन आरएसएस है। आखिर क्या परिस्थिति आई की अब आर एसएस के अपने संगठन भी भाजपा के नीति का विरोध कर रहे हैं । इससे मोदी सरकार रेल मंत्री को गंभीरता से लेना चाहिए एवं केन्द्र को अपने नीति में बदलाव लाना चाहिए।
