धरहरा (संवाददाता):श्रोताओं आज मै एक पुलिस कर्मी से मिला और उनसे इस महामारी पर बातचीत की तथा लाकडाउन के कारण उनकी ड्यूटी पर क्या असर पङा यह जानना चाहा।श्रोताओं उनकी बातचीत बहुत ही भावुक कर देने वाली थी।उन पुलिस कर्मियों ने कहा कि आपलोगों के जैसा हमारा भी एक परिवार है हमारे घर मे भी माँ-पापा,भाई-बहन सभी है।मेरा भी मन करता है कि उनलोगों के साथ थोड़ा समय गुजारू।मगर क्या करू मै एक पुलिस वाला हू मुझे परिवार से पहले मेरा फ़र्ज है।मेरे घर से सुबह से शाम तक करीब दस बार फोन आते हैं,किन्तु मै एक बार भी बात नही करता,क्योंकि मैं जानता हूँ कि उनका सवाल क्या होगा।जब रात मे बात होती है तो पूछती है कि आज दिन में कुछ खाया था कि नही।क्या कहूँ मैं माँ को कि अभी इस लाकडाउन मे भी हमलोगों को आराम नही है। लोगों को लगता हैं कि हमलोग बिना काम किये तनख्वाह लेते है,इसलिए तो ये लोग इस महामारी मे भी लाकडाउन के पालन को तोड़कर हमारी ड्यूटी की जाँच करने सङक पर चले आते है।उन्होंने कहा कि जिस दिन आपलोग हम सभी को चाहे जो भी लोग इस मुहिम में अपना योगदान दें रहे है अपने परिवार का सदस्य समझने लगेगे,उस दिन आप स्वयं घर पर रहकर हमारी मदद करगे।उस दिन हमलोगों की आधा परेशानी कम हो जायेगी।आप भी अपने घर में परिवार के साथ स्वास्थ्य और सुरक्षित रहेंगे और हम भी आपके सहयोग से स्वास्थ्य और सुरक्षित रह सकें।जी हाँ,श्रोताओं मोबाइल वाणी का हर संवाददाता आपसे यही अनुरोध करता है कि 'आप घर में रहे सुरक्षित रहें'।
