भारत की वैज्ञानिक आजादी गणपतराय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर, नरगाकोठी भागलपुर में दिनांक 11.01.2020, दिन शनिवार को विद्या मंदिर एवं तुलसी सामाजिक संस्था नाथनगर के संयुक्त तत्वावधान में व्याख्यान माला कार्यक्रम आयोजित किया गया। विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉक्टर तथागत अवतार तुलसी, केंद्रीय विश्वविद्यालय रांची के कुलपति प्रो0 नंद कुमार इंदू, आयुर्वेदिक कॉलेज के प्राचार्य डॉ चंद्र भूषण सिंह, अवकाश प्राप्त कुलपति डॉ जनार्दन झा, विद्यालय के प्रधानाचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा एवं तुलसी सामाजिक संस्था के अध्यक्ष आलोक पाठक द्वारा संयुक्त रूप से पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया l भारत की वैज्ञानिक आजादी- वास्तविक आजादी की ओर विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभाशाली डॉ तुलसी ने कहा कि हमारा देश सोने का चिड़िया था, यह विश्व गुरु भी कहलाता था परंतु आज हम विकासशील देश के श्रेणी में हैं l हम अपने प्रतिभा, बुद्धि कौशल, कल्पना शक्ति, परिश्रम एवं वैज्ञानिक सोच से अपने देश को विकसित कर सकते हैं l आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का समुचित सदुपयोग कर हम आगे की ओर विकासोन्मुख हो सकते हैं l वर्तमान समय में अनुकरणशील होकर के सुख की कामना से कल्पना कौशल का विकास भी आवश्यक हैl कल्पना कौशल, बुद्धि, परिश्रम एवं धैर्य से नए नए अविष्कार कर हम संसार को अचंभित कर सकते हैंl आज देश से प्रतिभा का पलायन हो रहा है, जो हमारे विकास में बहुत बड़ा बाधक है l शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता, देश भक्ति, वैज्ञानिक सोच एवं शोध करने की प्रवृत्ति से हम वास्तविक आजादी की ओर बढ़ेंगे, जीवन में आगे बढ़ने के लिए सुख की कल्पना को साकार करने के लिए, छात्रों को स्वप्न देखना भी आवश्यक हैl जिज्ञासा समाधान के क्रम में कहा कि सही दिशा निर्देश में कठिन परिश्रम करके छात्र सफल हो सकते हैंl आलोक पाठक ने कहा कि बिहार एवं भारत के मान सम्मान बढ़ाने वाले 10 वर्ष की उम्र में बीएससी, 12 वर्ष की उम्र में एमएससी तथा 22 वर्ष की उम्र में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से पीएचडी करने वाले तथागत तुलसी की प्रतिभा शिक्षकों के लिए अन्वेषण का विषय हैl इस प्रकार के तेजस्विता त्याग एवं प्रतिभा से नए भारत का निर्माण हो सकता है l अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर नंद कुमार इंदु ने कहा कि प्रतिभाशाली अवतार तुलसी सम्मान के पात्र हैंl इनके द्वारा किए गए कार्य अन्य छात्रों के लिए अनुकरणीय एवं प्रयत्न करने के योग्य हैl 22 वर्ष की उम्र में ही आईआईटी मुंबई के प्राध्यापक बनना अत्यंत ही आश्चर्यजनक व सराहनीय हैl अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान प्रधानाचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा के द्वारा एवं मंच संचालन डॉ संजीव कुमार झा के द्वारा किया गयाl मीडिया प्रभारी भागलपुर विभाग से शशि भूषण मिश्र की रिपोर्ट ।
