जीवन की आपाधापी में लोग इतना उलझ गए हैं कि अपने बच्चों पर वस्तों का बोझ तो लाद रहे हैं उनकी मासूम मानसिकता को भी नजरअंदाज कर रहे हैं इसका बहुत ही गहरा असर बच्चों के मन मस्तिष्क पर हो रहा है इससे होता यह है कि बच्चे अक्सर अपने आप को लोगों के बीच नहीं बल्कि किताबों के बीच पाते हैं वह अंदर ही अंदर अकेला महसूस करते हैं और फिर किसी को संगत में फंसकर अनुचित काम करने लग जाते हैं ऐसे में जरूरी है कि अभिभावक पढ़ाई लिखाई पर ध्यान देने के साथ-साथ बच्चों को अपना कुछ समय जरूर दें उनकी मन मस्तिष्क को समझे उन्हें अच्छे और बुरे का फर्क बताएं यथासंभव उनके साथ वक्त बिताएं बच्चों को समझना और उनका सही मार्गदर्शन करना ही माता-पिता का कर्तव्य बनता है। पूरी जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक कर सुनें पूरी खबर को।