नए नागरिकता कानून और सकल घरेलू उत्पाद की गिरती दर दोनों ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है स्थिति यह है कि बेरोजगारी चरम पर है भूखमरी लगातार बढ़ते ही जा रही है देश में लाखों व्यक्ति बिना खाए रात गुजार रहे हैं ऐसे में जब हम अभी तक फुटपाथ पर सोने वालों के लिए भी समुचित व्यवस्था नहीं कर पाए हैं तब दूसरे देशों से आने वाले नागरिकों को भला कहां ठहरने की जगह देंगे जब व्यापारी गिरती विकास दर के कारण अपने कदमों पर सही से खड़े नहीं हो पा रहे हैं अब हम बाहर से आने वाले नागरिकों को रोजगार कैसे देंगे केंद्र सरकार को अभी एक बार अपने फैसले पर सोच लेना चाहिए नए नागरिकता कानून में भी संशोधन किए जा सकते हैं अगर ऐसा नहीं हो सका तो विकासशील देश से विकसित देश की ओर बढ़ते हमारे कदम ठिठक सकते हैं या फिर उस पर पूर्ण विराम लग सकता है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।