आदिकाल से तालाब का जल संरक्षण मुख्य स्रोत माना जाना जाता था ऐसे में तालाब हैं जो अधिकार से माना जाता था कि मंत्रियों के अनुसार जनमानस के लिए नदी एवं तालाब जल का मुख्य स्रोत हुआ करता था जिसे लोग दैनिक कार्य में किसी कार्य में उपयोग किया करते थे इस परंपरा को वर्तमान काल में भी जीवित रखा गया था जब जनसंख्या बढ़ने लगी तो जल की समस्या धीरे-धीरे उत्पन्न होने लगी जल संकट को देखते हुए महाराजाओं ने के द्वारा जल संरक्षण के लिए जगह-जगह तालाब खुद वाया गया था ताकि लोग पानी पीने एवं दैनिक कार्य के अलावा कृषि में पानी का उपयोग करें इसके बावजूद प्रशासनिक उदासीनता के कारण कहीं लोग जल संरक्षण के अतिक्रमण करने से बाज नहीं आ रहे हैं कहीं तालाब के द्वार नहीं होने से ताला भरकर खेत में तब्दील होते जा रहा है बताते चलें कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण बन गया है वहीं दुर्गापुर पंचायत के मालिक हो गई है जो समस्या दूर हो सकती है प्रखंड विकास पदाधिकारी घोषणा की गई है लेकिन हमारे पास ऐसा कोई लिखित आदेश नहीं मिला हुआ है अगर सरकार देती है तो को चिन्हित कर कराया जाएगा बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि योजना का काम कराया जा सकता है
