बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बजट की बात आते ही आम लोगों से लेकर खास लोगों तक सभी के मन में तरह-तरह की उम्मीद है और आशंकाएं तैरने लगती है. ऐसा हो भी क्यों ना जेब ढीली होने की चिंता हर किसी को सताने लगती है। जो बजट से उम्मीद बांधना स्वभाविक है,आज पहली बार एक महिला वित्त मंत्री बजट पेश कर रही है लेकिन सवाल लाजिमी है कि क्या भयावह चुनौतियों से निपटने में बजट कारगर होगा। वह भी ऐसे समय में जब विकास दर पिछले 5 साल के सबसे निचले स्तर पर है। इतना ही नहीं इस समय देश में बेरोजगारी दर विगत 45 सालों से शीर्ष पर है,शिक्षित ही नहीं उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति भी स्थाई रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा है.इसका कारण स्पष्ट है कि सरकार न तो रोजगार सृजन करा रही है और न ही विभागों के निजीकरण प्रक्रिया को रोक पा रही है. हमारे देश के आंकड़े बताते हैं कि पंचानवे फीसदी युवा अपनी जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय उद्यमशीलता की बजाय नौकरी की तलाश में बर्बाद कर देते हैं। और हालात ऐसे भी है कि पूंजी के अभाव में उद्यमशीलता दूर की कौड़ी नजर आती है। इससे यह साफ है की यह वक्त सुधारों पर जोर देने का है और सुधार इस तरह हो कि रोजगार और विकास के साथ-साथ आम आदमी की बुनियादी जरूरतें भी पूरी हो सके।
