बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार जी कहते है कि पानी के मामले में गाॅवों की स्थित और भी ख़राब है। पानी को तो बचाया जा सकता है पर बनाया नहीं जा सकता है हमारे दादा जी ने नदी में पानी देखे,पिता जी ने कुए में पानी देखे,हमने नल में पानी देखा, हमारे बच्चों ने बोतल में अब उनके बच्चे कहाॅ देखेगें इस पर विचार होना चाहिए।गर्मी ने दस्तक दे दी है।इसके साथ ही पानी की किल्लत भी शुरू हो चुकी है।प्रशासन ने इसके निदान के लिए कोई भी व्यवस्था अब तक नहीं की है। पेयजल से निपटने के लिए ना तो नए चापाकल लगाये गये है और ना ही ख़राब पड़े हुए की मरम्मत करायी जा रही है। नगर निगम द्वारा वार्डो में जो समर सेवाल लगाए गए है जिनसे लगभग 120 या इससे भी ज्यादा घरो को पानी मिलता था वह भी ख़राब हो चूका है जिस वजह से इन वार्डो के लोगो को लगभग 20 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। नगर निगम का समर सेवुल बनवाने की ओर कोई ध्यान नहीं है
