सोमवार को नगर के वार्ड आठ स्थित कबीर चौरा संतोष आश्रम में तीन दिवसीय विशाल ज्ञान यज्ञ सत्संग समारोह का समापन हुआ। कबीर चौरा संतोष सेवा समिति के आयोजन में कबीर निर्णय मंदिर बुरहानपुर से पहुंच आचार्य महान साहेबजी अंतिम दिन जीवन, संसार एवं स्वयं को बाधने पर कबीर के विचारों को सुनाया। आपने कहा कि हमारे में जो संस्कार की प्रवृति या आसक्ति है वह हमें बांधकर रखती है। यहीं बंधन हमें तर्क करने, सदविवेक विचार करने और सत्य को जानने से रोकता है। संत कबीर कहते है कि मनुष्य ने संसार में रहते हुए उससे मोहित नहीं होना चाहिए। संसार का यही मोह आपको बंधन में बांध कर रखता है। इन बंधनों से मुक्ति पाकर ही आप स्वयं में परमशक्ति को पा सकते है। महान साहेबजी से जीवन का मर्म और मनुष्य स्वाभ पर विस्तार से जानकारी रखी। इस के पूर्व संत मंडली ने विचार रखते हुए अंधविश्वास, कुप्रथा, पाखंड, धर्म की परिभाषा और सत्य क्या है पर विस्तार से विचार रखे। सरंक्षक संतोष साहेब ने भी विचार रखे। समिति के अध्यक्ष भानुदास गोखे एवं पदाधिकारियों ने संत मंडली का स्वागत किया। आश्रम के सरंक्षक सदस्य महेश साहेब ने सत्संग का समापन किया। सत्संग का समापन आरती व भंडारा से हुआ। कबीर पंथी व आश्रम संचालन समिति के सदस्यों से संत मंडली का स्वागत कर गुरूवंदना की।
