बाल दिवस पर बचपन की यादो को याद करते हैं हम बचपन में भरी धुप में जब घंटी की आवाज आए तो समझ जाते थे, बुढ़ी के बाल या आईस गोला वाला आया होगा और जब हम मोहल्ले के बच्चे बहार निकल साईकिल वाले के पास भरी धुप में बीना चप्पल के खड़े रहते थे । जी हां आज भी आईस गोले की याद आती है । एक समय था जब गांव में मलाई बर्फ़ चार आना या अनाज (गेहूं) देने पर भी मिलती थी। बच्चें और बूढ़े भी मलाई बर्फ़ खाने के लिए खाली पैर धूप में बाहर निकल आते थे। उस समय संसाधन कम थे चीजे उपलब्ध तो थी पर आज जैसे आसानी से है वैसे नही पहले ये बर्फ गोला खाने के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता था लेकिन अब तो हर नुक्कड़ पे आइसक्रीम मिल जाती है रही सही कसर लस्सी, कोल्डड्रिंक और जोमेटो ने पूरी कर दी आज सब आसानी से उपलब्ध हैं पर पहले जैसे बात नही है आपने कभी अनाज के बदले मलाई बर्फ़ खाया हैं?
