हाल ही में मोबाइल वाली पर गुरुजी की डायरी का पहला एपिसोड प्रकाशित किया गया जिसमें विश्व प्रसिद्ध गोटमारा मेले लेकर विस्तृत परंपरा के नाम पर पाखंड को विस्तार से बतलाया है। साथी परंपराओं में हमने बदलाव स्वीकार किया, पर क्या आज भी गोटमार मेले में कोई बदलाव ला पाए जवाब है नहीं? और क्या आने वाले दिनों में लोगों की समझ और परंपरा में पाखंड को बदलने में कितना सफल होंगे। आज हमारे साथ अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के महासचिव हरिश देशमुख सर ने मोबाइलवाणी पर चल रही "गुर्वेजी की डायरी" पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की।
