डीडीसी कॉलेज में साहित्यिक व रुपांकन की विश्वविद्यालय स्तरीय स्पर्धाएं आयोजित ======================= राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलपति डॉ. एम. के. श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में डी. डी. सी. महाविद्यालय छिंदवाड़ा में आयोजित विश्वविद्यालय स्तरीय साहित्यिक और रूपांकन पक्ष की स्पर्धाओं को संपन्न कराने हेतु समारोह के मुख्य अतिथि सी.जी.एम. श्री रामा राव ने कहा कि प्रतिस्पर्धियों द्वारा साहित्यिक चिंतन हाशिए पर पड़ी विवशता की पीड़ा की अभिव्यक्ति होती है। साहित्य का दर्शन मानव की अनसुलझी गुत्थी को सुलझाने का विकल्प देता है। प्राचार्य प्रो. स्मृति हाबिल ने कहा कि साहित्य की विधाएं छात्रों को मनुष्यता निर्माण की अनंत विचारशीलता प्रदान करते हैं। कुलसचिव डॉ.धनाराम उइके ने कहा कि रुपांकन की विधाएं छात्रों के चिंतन की परिधि को उड़ान के पंख प्रदान करते हैं। छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. जगदीश वाहने ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य व रुपांकन की स्पर्धाएं छात्रों में संचित वैचारिक निधि से जीवन के विभिन्न आयामों में व्यवहार में काम आती हैं। विश्वविद्यालय की युवा उत्सव प्रभारी डॉ. श्रीमती अर्चना सुदेश मैथ्यू ने कहा कि युवा सृजनशीलता की शक्ति को हथियार बनाकर सामाजिक समस्याओं को हल करें। साहित्यिक विधाओं की प्रस्तुति की समीक्षा करते हुए प्रख्यात ओजस्वी वक्ता शिक्षक ओ पी शर्मा ने कहा कि भयभीत व्यक्ति समाज में कोई भी रचनात्मक कार्य नहीं कर सकता है। अगर वक्ता में कहने का सलीका और सुनने लायक अवधारणात्मक कथ्य है तो बात अवश्य सुनी जाती है। विश्वविद्यालय पर्यवेक्षकों में प्रो. राजेन्द्र कुमार मिश्रा छिंदवाड़ा, डॉ. सविता मसीह सिवनी, डॉ. निधि ठाकुर बालाघाट एवं डॉ. राजेश शेषकर बैतूल का प्रमुख योगदान रहा। डी.डी.सी. कॉलेज के युवा उत्सव प्रभारी बी. बी. भुजाड़े, श्रीमती स्वाति जैन, अनमोल भारद्वाज , कु.माया पांडे, माया शर्मा, महेश घायवट, गणेश सोनी और सुरेंद्र धुर्वे का सराहनीय योगदान रहा। छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. जे. के. वाहने, कुलसचिव डॉ .डी. आर. उइके, शिकायत निवारण समिति के डॉ. नन्दा हल्दे , डॉ. अनिता मिश्रा, डॉ. विनोद माहुरपवार, भोजन व परिवहन समिति के डॉ. सुरेन्द्र झारिया, डॉ.एस सी लाम्बा प्रमुख रहे। पी.जी. कॉलेज के डॉ. लक्ष्मीकान्त चन्देला , डॉ. टीकमणी पटवारी, मीडिया प्रभारी डॉ. अमरसिंह डॉ. सीमा सूर्यवंशी व डॉ. दुर्गेश ठाकुर ने अतुलनीय भूमिका निभाई। रूपांकन पक्ष के निर्णायक दल में प्रशांत गंगणे, रोहित रूसिया, डॉ. प्रतिभा श्रीवास्तव, साहित्यिक पक्ष के डॉ. मनीषा जैन, श्रीमती शैफाली शर्मा और दिनेश भट्ट प्रमुख थे।
