मध्यप्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिला से दिनकर पातुलकर बालिका शिक्षा और बालिकाओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में नासिक से छिंदवाड़ा तक की 870 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र उपासनी जी से साक्षात्कार लिया है। जिसमें उन्होंने बताया कि जब हम बेटियों पर बात करते है तो एक संवेदनशील विषय की तरफ जा रहे होते है। आज हम बेटियों की शिक्षा पर इतनी सुविधाएं जुटा पा रहे है और इसे आधुनिकतम बनाए हेतु प्रयासरत है,इन सब प्रयासों की शुरुआत हमारे इतिहास में भी हमें देखने को मिलती है। आजकल बुजुर्ग कम होते जा रहे है बहुत से परिवारों में पति पत्नी और बच्चे रहते है माता पिता कही और रहते है ऐसे में हम बच्चो तक नैतिकता पहुँचाने में असफल हो रहे है क्यूंकि नैतिकता पहुँचाने में बुजुर्गों का महत्वपूर्ण माध्यम हुआ करता था जो लुप्त होता जा रहा है। उन्होंने बताया की बेटियां कितना भी पढ़ लिख ले अगर उनमे नैतिक बल नहीं है तो कहीं ना कहीं एक बहुत बड़ा हमारे वक्तित्व के निर्माण में कमी रह जाती है