किसान अपनी मांग पर अडे, अधिकारी देते रहे नियमों का हवाला बैठक संपन्न, परिणाम शुन्य ---------------------------------------------------------------------- मोहगांव जलाशय पीड़ित किसान पहुंचे तहसील मुख्यालय पीड़ित किसान पिछले 2 वर्षों से अपनी मांगों को लेकर जलाशय निर्माण स्थल पर धरना दे रहे हैं जिसमें पीड़ित किसानों की मुख्य मांगे भू अर्जन अधिनियम 2013-14 के अनुसार 11 सूत्री मांगों को लेकर धरना आंदोलन जारी 19 जनवरी 2020 से पीड़ित किसानों के द्वारा निर्माण कार्य रोक कर धरना दिया जा रहा है 10 तारीख को अचानक शासन प्रशासन के द्वारा बिना किसानों के सूचना निर्माण कार्य चालू किया गया जिस पर पीड़ित किसानों के द्वारा निर्माण स्थल पर पहुंचकर कुवे का कार्य रोका गया जिसके बाद 11 तारीख को एसडीओपी जल संसाधन के द्वारा कार्य को पुनः चालू किया गया जिसमें पीड़ित किसान के द्वारा निर्माण स्थल पर जाकर कार्य को रोक एसडीओपी जल संसाधन के द्वारा एक पंचनामा बनाया गया जिसमें पीड़ित किसानों पर एफ आई आर दर्ज की जानकारी दी गई पीड़ित किसान सुबह अपने धरना स्थल पर जब एकत्रित हुए उनको जानकारी लगी सभी पीड़ित किसान तहसील मुख्यालय पहुंचे तहसीलदार महोदय को जब इस बात की जानकारी लगी उन्होंने पीड़ित किसानों से चर्चा की गई एवं मीटिंग हॉल में बिठाकर जल संसाधन एवं तहसीलदार महोदय के द्वारा लगभग 2 घंटे मीटिंग चली जिसमें 29 सितंबर 2021 को डिप्टी कलेक्टर महोदय के द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार सर्वे पर सहमति बनी विभाग के द्वारा जानकारी दी गई है कि जल्द से जल्द पीड़ित किसानों का सर्वे किया जाएगा इसी प्रकार से विभाग के द्वारा इसके पहले भी बात कही गई लेकिन विभागों की बातों के अनुसार आज तक पीड़ित किसानों के कोई भी मसले क्लियर नहीं हुए हैं इसलिए अभी भी पीड़ित किसानों को पूरी तरीके से विश्वास नहीं है क्योंकि विभाग के साथ पीड़ित किसानों की आज दिनांक की बैठक को पकड़कर 12 दौर की बैठक हो चुकी है विभाग के द्वारा आश्वासन तो दिए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है इस जलाशय पीड़ित किसानों में से अभी तक 53 किसानों के द्वारा अपनी जान गवाई जा चुकी है जिसमें कई लोग कई लोग सदमे से मरे हैं एवं कई लोग ने आत्महत्या की है कई लोग गंभीर बीमारी के चलते पैसे नहीं होने के कारण मृत्यु हुई है इन सब के लिए विभाग जिम्मेदार हैं क्योंकि विभाग की लापरवाही की वजह से किसानों को आर्थिक क्षति पहुंची हैं आज भी विभाग अपने कार्य को गति ना देते हुए निर्माण कार्य पर ज्यादा ध्यान देते हैं विभाग जब भी बैठक करता है किसानों के सामने कंडीशन रखता है निर्माण कार्य चालू करने की बात करता है जबकि विभाग पीड़ित किसानों की बातों को उनके सर्वे एवं अन्य चीजों पर ध्यान कम देता है इसीलिए पीड़ित किसानों मैं काफी आक्रोश है और पीड़ित किसानों के समय रहते अगर काम नहीं हुआ तो पीड़ित किसान अपने आंदोलन को उग्र करेंगे उसके लिए शासन प्रशासन जिम्मेदार रहेगा
