रानसब्जी वाघाटी का विशेष महत्व है आषाढ़ी एकादशी पर छिंदवाड़ा - वैष्णव पंथ एवं वारकरी सांप्रदाय के श्रद्धालुओं के लिए आषाढ़ी एकादशी पर उपवास व्रत छोड़ने के लिए वाघाटी रानसब्जी का विरोध महत्त्व है वर्षों से चली आ रही इस पंरपरा में वाघाटी के इस फल को गोविंद फल भी कहते हैं । आषाढ़ी एकादशी पर विशेष महत्व होने के कारण इस फल की अधिक मांग होती शहरी क्षेत्र में चार से पांच सौ रुपए किलो बिकती है वहीं ग्रामीण क्षेत्र में सौ से दो सौ रुपए किलो बिकता है यह गोविंद फल वाघाटी । आयुर्वेदिक महत्त्व भी है इस फल का इस संबंध में ग्रामीणों के अनुसार पित्तनाशक, वातनाशक, कपनाशक के अलावा विविध बिमारियों में इस फल की बेला की जड़ ,पत्ते, फुल और फल उपयोग में लाते हैं ग्रामीण वैध लोग । मुलत: यह बेला कटेली होती है जंगली भागों के अलावा नदी-नाले एवं खेतों के कुंपन पर मिलती है । महाराष्ट्र,विदर्भ एवं मध्यप्रदेश के हिस्सों में आषाढ़ी एकादशी पर इस फल की सब्जी खाकर हि व्रत छोड़ने की पंरपरा है ।
