हमारे देश में सभी को शिक्षा का अधिकार है लेकिन लड़कियों को इसके लिए कहीं अधिक संघर्ष करना पड़ता है। कई बार घर के काम के बोझ के साथ स्कूल के बस्ते का बोझ उठाना पड़ता है तो कभी लोगों की गंदी नज़रों से बच-बचा के स्कूल का सफर तय करना पड़ता है। जैसे-तैसे स्कूल पहुंचने के बाद भी यौन शोषण और भावनात्मक शोषण की अलग चुनौती है जो रोज़ाना उनके धैर्य और हिम्मत की परीक्षा लेती है। ऐसे में लड़कियों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन के साथ साथ समाज की भी है। तब तक आप हमें बताइए कि * -----लड़कियों के स्कुल छोड़ने के या पढ़ाई पूरी ना कर पाने के आपको और क्या कारण नज़र आते है ? * -----आपके हिसाब से हमें सामाजिक रूप से क्या क्या बदलाव करने की ज़रूरत है , जिससे लड़कियों की शिक्षा अधूरी न रह पाए।

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बिहार राज्य के कैमूर जिला के बेलाओ गाँव के हमारी एक सवाददाता सरिता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया है कि उनके गाँव के जो ठेकेदार है जो लोगों को मनरेगा में काम करवाते हैं वो मजदूरों के हक़ के पैसे और सरकारी लाभ उन्हें नहीं दे रहा है। जिससे वहाँ के लोग बहुत परेशान है

लक्खीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, खेमतरणी स्थान की शिक्षिका सरिता कुमारी बतला रही है कि बच्चे और महिलाएं इस देश मे सुरक्षित नही है उनमें असुरक्षा की भावना रहती है जिसे दूर करने के लिए हमे जागरूकता अपने घर से ही शुरू करने की जरूरत है।

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