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जिला लखीसराय, से हमारे एक श्रोता मोबाईल वाणी के मध्यम से बता रहे है की खेती में किसानों की काफी सारी पूँजी लगी हुई है लेकिन प्याज के दाम कम होने के कारण किसानों का हाल बहुत ही ख़राब हो गया है क्यूँकि दाम में गिरावट होने से किसानों का पूँजी तक नहीं लौटा है जिससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है और साथ ही वर्षा नहीं होने के कारण धान की खेती भी सही से नहीं हुई है । ये विधायक से कहना चाहते यहाँ जल्द-से जल्द सिंचाई की व्यवस्था करे नहीं तो किसानों को काफी मुश्किलो का सामना करना पड़ेगा ।
मनजोत प्रखण्ड के विजय द्वारा बताया गया है कि प्रखंड के मनजोत गांव के मनजोत मध्य बिद्यालय में आज तक पोशाक राशि नहीं बाटने के कारण बिद्यालय की छत्र छात्राओ के मन में असन्तोष की भावना पनप रही है इस बात पर जब बिद्यालय परधयनपक से संपर्क किया गया तो उसने पूरी राशि नहीं मिलने का कारन बताया साथ में उसने बताया कि जबतक विभाग नहीं भेजती है तो हम राशि बाटने में असमर्थ है कारन जिस बिद्यार्थी को हम राशि नहीं देंगे उसके अभिभावक हमारे साथ गलत ब्यवहार पर उतर आएंगे। विभागीय लापरवाही के कारण प्रखंड की अनेक बिद्यालय की स्थिति ऐसी ही है जिससे बच्चो के बिच अभी तक पोशाक राशि का वितरण नहीं किया गया है
मनजोत के विजय कुमार सिंह न्यूज़ एक्सप्रेस के माध्यम से बता रहे है कि मनजोत गावं के स्वस्थ्य केंद्र वर्षों से खली पड़ा हुआ है। इस सुशासन की सरकार में उपलब्धियाँ गिनाने को तो बहुत कुछ है। लेकिन प्रखंड से लेकर जिला स्तरीय के किसी पदाधिकारी ने इस स्वास्थ्य केंद्र के बारे में जानने की जहमत मूल्य नहीं ली। लोग अपना स्वास्थ्य का इलाज गावं के झोला छाप डाक्टर से करवाते है जो इसका खून चूसने के लिए ततपर्य रहते है। मालूम है की वर्षो पहले इस स्वास्थ्य केंद्र पर सारी सुख सुविधाएं मिलती थी लेकिन आज न तो भवन सही है, न तो दवा नई ही पेशेंट है ,कहने को तो एक नर्स है जो केवल टीकाकरण के दिन लोगो को दिखाई देती है। किन्तु गावं वालो को इससे कोई फायदा नहीं मिलती जबकि सरकार इस स्वास्थ्य केंद्र के नाम पर आवंटन भी क्र रही है
मनजोत से विजय कुमार सिंह न्यूज़ एक्सप्रेस के माध्यम से बता रहे है कि मनजोत प्रखंड के पंजाब नेशनल के एक मात्र शाखा के होड़ी के शाखा प्रबन्धक के द्वारा मनमाने तरीका से के. सी.सी. लोन का बितरण क्र रहे है। पहले तो भोले भाले ग्रामीणों को बैंक का चक्क्र लगवाकर थकवाते है। फिर निराश किसान मजबूर होकर शाखा प्रबंधक को मनमाफिक कमीशन देकर अपना ऋण स्वीकरीति करवाते है। इस बयवस्था में कुछ विचौलये भी शामिल है जो शाखा प्रबंधक का बीच काम करते है। और शिकायत की बात करने पर वो देख लेने की बात करते है। यहाँ किसी प्रकार का कोई अंकुश जिला प्रसाशन के द्वारा भी नहीं लगाया जा रहा है
अलीगंज हाई स्कूल की छात्रा पूजा कुमारी ने बताया की हमारे हाईस्कूल में छात्रओ को छात्रवृति की राशि नहीं दी जाती है.छात्रा पूजा कुमारी का यह भी कहना है की क्या हम लोग छात्रवृति लेने लाया लायक नहीं है पूजा ने कहा कि हम लोग बहुत गरीब है क्या हमलोग गरीब है इस लिए कोई हक नहीं है छात्रवृति लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहती हूँ पढ़ना का।
जमुई के अलीगंज से चंद्र शेखर आजाद न्यूज़ एक्सप्रेस के माध्यम से बता रहे है कि स्वछ भारत अभियान के तहत देश भर में स्वछता का अभियान चलया जा रहा है। लेकिन जमुई जिले के विभिन्न प्रखंड की स्वास्थ्य केंद्र में चारो तरफ गन्दगी का अंबार लगा हुआ है। लेकिन इसकी सफाई का कोई पहल नहीं की जा रही है। जिससे लोग परेशान है
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अलीगढ़ के मोहनपुर से खुश्बू कुमारी के द्वारा यह बताया जा रहा है। कि राज्य मानवाधिकार आयोग एवं शिक्षा विभाग बिहार द्वारा शिक्षा के पाठ्यक्रम में मानवाधिकार विषय को शामिल किया जाना। प्रहणीय पहल है इसकी पढाई से छात्र छात्रों को मानवाधिकार की बेसिक जानकारी होगी। और वे नागरिक अधिकारी के प्रति सजग होंगे। इससे वे सजग नागरिक बनेंगे। उनके जरिये आस पास के लोगों को मानवाधिकार के प्रति जागरूक होने में मदद मिलेगी। इस समय देश के लगभग पचास स्कूलों के सिलेबस में मानवाधिकार की पढ़ाई शामिल है।
बिहार के मोहनपुर अलीग़ढ से खुश्बू कुमारी के द्वारा ये बताया जारहा है , कि बच्चों को मलेरिया से बचाने के लिए नई दवा इजात कराने का दावा किया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक दो दवाओं के मिश्रण से तैयार नै दवा बच्चों को मलेरिया से बचाने के लिए मदद करेगी। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेटर्स ऑस्ट्रेलिया के के तीन वैदेविक ने बतया की ऐसी जगहों पर जहाँ मच्छरों के कई प्रजातियां मलेरिया फैलाती है वहाँ आरटेमेसेटियन और नेस्टोकिन दवाओं को एक साथ देना इसके ईलाज में कारागार हो सकता है। अध्ययन में वर्तमान मलेरिया रोधी दवाओं के साथ एक इस नए मिश्रण के प्रभाव का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि वर्तमान नया मिश्रण वर्तमान दवा उपलब्ध से किसी भी मामले में कम प्रभावी नहीं है। बल्कि कुछ परजीवी के मामले में यह कुछ ज्यादा ही कारागार पाया गया है।
