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ज्योति जी सिकंदरा जमुई से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि केंद्र और राज्य सरकार को जनहित को देखते हुए प्लास्टिक की थैली पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। इसके प्रयोग से एक और जहाँ प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है वहीँ प्लास्टिक के इस्तेमाल से आये दिन मनुष्यों की मौत हो रही है। शोध से यह साबित हो चूका है कि प्लास्टिक बनने में जहरीले रसायन का प्रयोग होता है। परायः लोग खाने पिने की चीज़े लोग प्लास्टिक की थैली में रख लेते है ,उसके बाद थैले में रखे सामान का सेवन करते है जिससे शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

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ज्योति कुमारी जी सिकंदरा जमुई से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि शहरी एवम ग्रमीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों की चपेट में गरीब व अनपढ़ लोग आसानी से फास जाते है। बिहार राज्य में औसतन चार लाख फर्जी डॉक्टर है। गार्मिन इलाकों में ऐसे ज्यादातर डॉक्टर अपना क्लीनिक खोल कर बैठे है।,बिना किसी डिग्री के अपने बोर्ड पर तरह तरह के डिग्री लिखवाकर लोगों को फस कर कामयाब हो रहे है। जानकारी के बिना मरीजों की छिड़ -फाड़ कर उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते आये है। आये दिन कहीं न कहीं झोलाछाप डॉक्टरों की करतूतों का भंडा फोड़ होता रहता है। तभी जानकर प्रशासन भी हरकत में आता है। जगह जगह छापेमारी की जाती है और इस मामले को कचड़े के डब्बे में डाल दिया जाता है। वे सक्रीय हो जाते है इसलिए सरकार को इसके खिलाफ बने कानूनों का पालन कड़ाई से करवाना चाहिए ,ताकि गरीबों की जिंदगी के साथ कोई खेल न सके

ज्योति कुमारी जी सिकंदरा जमुई से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि शादी एक सामाजिक समारोह है। अकसर देखा जाता है कि शादियों में बिना जरुरत के अनुसार पैसा खर्च करते है,इसके लिए वे कर्ज लेने से भी नहीं चूकते है। लोग शादी ऐसे धूम धाम से करना चाहते है कि हमेशा यद् रख सके। हलाकि यह स्वाभाविक मानवीय इक्षा है ,लेकिन यह इक्षा बेकाबू हो जाती है। लोग अपनी चादर के बहार पाव पसारने लगते है। लोग शादियों में इतना खर्च करते है कि उनका जीवन चौपट हो जाता है,कर्ज चुकाना कठिन हो जाता है। हर आदमी अपनी तुलना अपने से ज्यादा मालदार लोगों से करने लगता है ,दूसरों की देखा -देखि लोग अंधाधुन खर्च करते है। इस खर्च को पूरा करने के लिए लोग या तो कर्ज ले लेते है या अपनी जमीं जायजात बेच देते है और बईमान लोग भर्ष्टाचार में दुब जाते है

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