चितरंजन कुमार:- एक गांव जहां केवल बांस के पेड़ हुआ करते थे,लेकिन एक वृद्ध व्यक्ति के संकल्प से आज वह गांव में हरीयाली ही हरियाली है।उस वृद्ध व्यक्ति को तत्कालीन जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने किया था समानित. अक्सर हमलोगों को अपने जीवन काल में नाना-नानी या दादा-दादी के द्वारा कोई कहानी सुनने को मिलता है, लेकिन आज आपलोगों को एक वृद्ध व्यक्ति के कर्मों की एक छोटी-सी कहानी बताने जा रहा हूँ. यह कहानी औरंगाबाद जिले के भगवान भास्कर की नगरी देव से सटे एक छोटे से गाँव भटबिगहा के रहने वाले श्री रामबुझावन यादव से जुड़ी है। जिन्हें सरकार भले ही अपने कोलफिल्ड्स के कामों से 1990 ई. में सेवानिवृत्त कर दिया हो,लेकिन अपने जीवन के सफर को लगभग 100 साल पार कर चुके हैं इन्होंने कभी अपने मेहनत से समझौता नहीं किया. कोलफील्ड्स से सेवानिवृत्त होने के बाद इन्होंने किसी बड़े शहरों में रहने के बजाय अपने गाँव भटबिगहा में ही जीवन यापन किया।जिस गाँव में कभी सिर्फ एक बाँस का पेड़ हुआ करता था वहाँ अकेले इन्होंने हजारों पेड़ लगाकर पूरे गाँव को हरियाली से पाट दिया. जमीन चाहे किसी का भी हो इनका मकसद सिर्फ खेत के किनारे पर पेड़ लगाना है. आज भी पेडों से लगाव के साथ-साथ इनकी नजरें इतना तेज है कि किसी भी छोटे-से-छोटे पौधे को देख कर उसका नाम बता देते हैं. इनके द्वारा किये गए परोपकारी कार्यो को देखते हुए औरंगाबाद जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) राहुल रंजन महिवाल के द्वारा इनको सम्मानित भी किया जा चुका है.अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर 2018 में भी जवाबदेही परिवार के तौर पर देव सूर्य मंदिर का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया जा चुका है. इनके मेहनत और परोपकारी कर्मों के मिले फल से आज इनके पुत्र और पोतें को Doctors तो कोई Engineer तथा राज्य सरकार से लेकर केन्द्र सरकार में उच्च अधिकारी के पदों पर पदस्थापित हैं. अपने परिवार के लाख आग्रह करने के बाद भी ये अपने गाँव छोड़कर कहीं और रहने को तैयार नहीं हुए और आज इतनी उम्र में भी पेड़-पौधों के सेवा में ही लगे रहना इनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है. प्रेरणा - आज विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर हम सभी युवाओं को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए कि अपने जिंदगी में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएं, ताकि आने वाला पीढ़ी शुद्ध हवा के साथ-साथ हरे-भरे माहौल में जीवन का आनंद ले सके.