हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड से तेजनारायण प्रसाद कुशवाहा जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि उनके हजारीबाग प्रखंड में जल,वायु एवं ध्वनि प्रदूषण चरम सीमा पर पहुँची हुई है। जिससे लोगो की आंशिक दृष्टि और सुनने की शक्ति धीरे-धीरे समाप्त होते जा रही है। आज के समय में जितने भी शादियाँ हो रही है उसके अंतर्गत जो डी.जे बाजा बजाया जाता है जिसके कारण ध्वनि प्रदूषण को ज्यादा बढ़ावा मिल रहा है। प्रदूषण से लोगो की स्वास्थ्य पर असर पड़ते दिख रहा है।
बीरबल महतो,धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि प्रदुषण एक जटिल समस्या बनी हुई है।ईंधन मानव जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है,इसके लिए कोयला खाद्यान और पावर प्लांट लगाए गए है.ये सभी मनुष्य की सुरक्षा हेतु बनाया गया है परन्तु खाद्यान और पावर प्लांट लगाने के लिए जंगलो का सफाया कर दिया जा रहा है।जिस कारण प्रदुषण की समस्या काफी बढ़ गई है।सरकार द्वारा प्रदुषण रोकने की बात हाथी की दांत के सामान है.सरकार प्रत्येक वर्ष प्रदुषण के नाम पर हजारो रुपया खर्च करती है लेकिन यह सिर्फ कागजो पर खानापूर्ति के लिए दिखाया जाता है और आवश्यकतानुसार पेड़ नहीं लगाया जाता है।अतः प्रदुषण रोकने के लिए वृक्ष अधिक लगाना चाहिए तभी प्रदुषण को रोकना संभव हो पायेगा।
मोहदा धनबाद से बीरबल महतो जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि पर्यावरण प्रदूषण एक जटिल समस्या है। जितने भी पॉवरप्लांट एवं कोयला खदाने है वे सभी मनुष्य के आवश्यकता की पूर्ति हेतु है।लेकिन खदान एवं पावर प्लांट लगाकर दिन-प्रतिदिन जंगलो में पेड़-पौधों को काटा जा रहा है जिसके कारण प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है।सरकार प्रत्येक वर्ष बीज रोपण एवं पर्यावरण बचाव पर सरकार कुछ करती हुई दिखाई देती है लेकिन ये सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति के लिए दिखाया जाता है। आज तक आवश्यकतानुसार पेड़-पौधे नहीं लगाए गए है, जिसके कारण प्रदूषण बढ़ते जा रहा है।इसलिए इस बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए हम सभी को मिलकर पेड़-पौधे लगाना चाहिए, साथ ही जो पेड़-पौधे काटे जा रहा है उसे भी रोकना होगा।
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बीरबल महतो,धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि प्रदुषण एक जटिल समस्या बनी हुई है।ईंधन मानव जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है,इसके लिए कोयला खाद्यान और पावर प्लांट लगाए गए है.ये सभी मनुष्य की सुरक्षा हेतु बनाया गया है परन्तु खाद्यान और पावर प्लांट लगाने के लिए जंगलो का सफाया कर दिया जा रहा है।जिस कारण प्रदुषण की समस्या काफी बढ़ गई है।सरकार द्वारा प्रदुषण रोकने की बात हाथी की दांत के सामान है.सरकार प्रत्येक वर्ष प्रदुषण के नाम पर हजारो रुपया खर्च करती है लेकिन यह सिर्फ कागजो पर खानापूर्ति के लिए दिखाया जाता है और आवश्यकतानुसार पेड़ नहीं लगाया जाता है।अतः प्रदुषण रोकने के लिए वृक्ष अधिक लगाना चाहिए तभी प्रदुषण को रोकना संभव हो पायेगा।
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