झारखंड राज्य के धनबाद जिला के तोपचाँची प्रखंड से फर्केश्वर महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि सरकार द्वारा जारी की गई योजना धरातल पर उतरते नजर नहीं आ रही है। जिस कारण राज्य में बेरोजगारी की संख्या में दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्षों पहले ग्रामीणों ने सरकार से रोजगार मुहैया कराने की माँग की। तभी सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागु किया जोकि कुछ वर्षो तक बहुत ही अच्छा चला। परन्तु हाल के दिनों में धनबाद जिला के तोपचाँची प्रखंड एवं झारखंड प्रदेश अंतर्गत लगभग छः माह से इस योजना में मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। सरकार केवल यह घोषणा करती है कि देश को डिजिटल इण्डिया बनाना है लेकिन बेरोजगारी की स्थिति को देखते हुए यह प्रतीत होता है कि सरकार को सबसे पहले रोजगार इण्डिया बनाने की जरूरत है। इससे सरकार के कार्यों पर यह सवाल भी खड़ा हो जाता है कि आखिर सरकार विकास की बातें क्यों करती है जब राज्य में रोजगार की स्थिति इतनी दयनीय है। अतः जनता यह मांग करती है कि मनरेगा कानून को सुचारु रूप से लगातार चलाया जाए साथ ही गरीब बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराया जाए। ताकि राज्य के किसान मज़दूर पलायन ना करें।

इन दिनों देश में जो हालात हैं वो किसी से छिपे हुए नहीं है. हर जगह धरना प्रदर्शन हो रहे हैं, आंदोलन हो रहे हैं. लोगों का गुस्सा उबाल मार रहा है. सरकार के खिलाफ जन आक्रोश वाकई परेशान कर देने वाला है.लेकिन इन सबके पीछे दबाया जा रहा है देश में मंदी का मुद्दा.इस बार जनता ने हमें बताया कि कैसे मंदी के कारण ग्रामीण विकास के काम अटके हुए हैं और उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.ऑडियो पर क्लिक कर सुनें श्रोताओं की प्रतिक्रियाएँ।

मंदी के मकड़जाल में फंसने वालों में केवल शहरी युवा ही नहीं हैं बल्कि ग्रामीण युवा भी हैं. केवल शहर की नामी कंपनियां ही नहीं बल्कि गांव का मनरेगा भी शामिल है. जो युवा शहरी कंपनियों से बाहर निकाल दिए गए हैं वो गांव पहुंचे हैं और यहां भी मनरेगा में उन्हें काम नहीं मिल रहा है. अगर काम मिला है तो पैसा नहीं है... ज्यादा जानकारी के लिए अभी क्लिक करें और सुनें....