सरिया/गिरिडीह सरिया प्रखंड झामुमो के द्वारा चार सूत्री माँगो को लेकर प्रखंड मुख्यालय के सामने मंगलवार को एकदिवसीय धरना दिया, एवं मांगों से सम्बंधित ज्ञापन राज्यपाल के नाम सरिया एसडीएम को सौंपा,पूरी खबर के लिए ऑडियो क्लिप सुने।

देश में चल रहे किसान आन्दोलन के समर्थन शनिवार को किसान बिल वापस लेने की मांग को लेकर माले समर्थित संगठन अखिल भारतीय किसान महासभा बगोदर ईकाई  के द्वारा  बगोदर के घंघरी स्थित  टोल प्लाजा को तीन घंटों तक फ्री करवा दिया गया।और केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और किसान बिल वापस करने की मांग की।मौके पर विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि एक पखवाड़े से किसानों ने देश की राजधानी दिल्ली में घेरा डालो डेरा डालो का प्रदर्शन कर रहे और मोदी सरकार के कानो जूं तक नहीं रेंग रही है।कानून पास होने के पहले ही अडानी और अबंनी को करोड़ों की पूंजी निवेश करने की सरकार करार कर चुकी है।इसके लिए हरियाणा में गोदाम खुल गई है।और रेलवे लाइन भी बिछाया जा रहा है।वहीं किसानों ने दिल्ली से आह्वान किया था कि देश मे  जितने भी टोल है फ्री किया जाय। इसी के तहत बगोदर  के घंघरी टोल प्लाजा को फ्री कराया गया है। वहीं घंघरी टोल प्लाजा के धर्मवीर ने बताया कि टोल फ्री होने से डेढ लाख रूपये का नुकसान हुआ है।मौके माले के जिला सचिव मनोज भक्त  समेत कई लोग शामिल थे।        

नए कृषि कानूनों को वापस करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित किसानों के अन्य अधिकार सुनिश्चित करने वाले कानून लागू करने की मांग को लेकर आज आहूत देशव्यापी 'टोल वसूली रोको आंदोलन' के तहत बेंगाबाद में एनएच 114 पर भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने कई घंटों तक टोल वसूली रोक दिया।कार्यक्रम की अगुवाई पार्टी के राज्य कमेटी सदस्य राजेश कुमार यादव तथा गिरिडीह विधानसभा प्रभारी राजेश सिन्हा ने करते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए एक साजिश के तहत तीनों कृषि कानून लाए हैं। इसमें से किसी भी कानून से किसान का भला होने वाला नहीं, लेकिन कारपोरेटों का पूरा कब्जा कृषि क्षेत्र पर कराने की गारंटी की जा रही है।

किसान बिल के विरोध में किसान संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद के समर्थन में मंगलवार को बगोदर में भाकपा माले व झामुमो के लोग सड़क पर उतरे और केन्द्र सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की। इसके पूर्व बगोदर विधायक विनोद सिंह के साथ माले कार्यकर्ताओं ने सरिया रोड स्थित पार्टी कार्यालय से विरोध मार्च निकाल कर पूरे बगोदर बाजार का भ्रमण कर जीटी रोड चैराहा पहुंचे और जीटी रोड को जाम कर दिया। इस दौरान सभी कार्यकर्ता केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।बगोदर विधायक विनोद कुमार सिंह कहा कि एक पखवाडे से देश के राजधानी दिल्ली में लाखों किसान इस शीत लहरी में केन्द्र सरकार के खिलाफ किसान बिल वापस लेने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन केन्द्र की भाजपा सरकार कान में तेल डालकर सोयी हुई हैं। मौके पर माले से पवन महतो, संदीप जायसवाल, सरिता महतो, मुस्ताक अंसारी, पुरन महतो, सरिता साव, झामुमो से रामचंद्र महतो, बंधन महतो, अनवर अंसारी, भीखी समेत कई लोग शामिल

केंद्र सरकार द्वारा पारित नए किसान बिल के विरोध में पूरे भारत के किसानों द्वारा बुलाए गए बंद को सफल बनाने के लिए कांग्रेश सहित झारखंड मुक्ति मोर्चा  एवं मार्ले एवं अन्य विपक्षी दलों ने बंद के समर्थन मे  उतरते हुए गिरिडीह के शहरी इलाको सहित सभी प्रखंडों में  चक्का जाम कार्यकर्म में बढ़ चढ़  कर भाग लिया। एक तरफ जे एम् एम् के बिधायको ने गिरिडीह शहर में मोर्चा संभाला तो वही जे एम् एम् , कॉग्रेस तथा माले ने डुमरी के सिमरा डीह  में एनएच २ के बिच सड़क में बैठकर एन  एच  २ को बाधित कर दिया जिससे कोलकत्ता  एवं दिल्ली  तरफ से आने वाले वाहनों की लम्बी कतार कड़ी हो गयी वही  बगोदर में  माले विधायक बिनोद  सिंह  के नेतृत्व में माले कार्यकर्ताओ ने बंद के समर्थन में च क्का जाम कार्यकर्म को सफल बनाया हलाकि प्रशाशनिक अधिकारियो के निवेदन पर एन  एच २  में बैठे राजनितिक दलो  के कार्यकताओ ने सड़क से उठ गए तत्पश्चात वाहनों आवाजाही शुरू हुई।      समर्थन में झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता और कार्यकर्ता  बंदी को सफल बनाने के लिए सवेरे से जुलूस निकालते  हुए स्थानीय दुकानदारों से अपने अपने संस्थानों को बंद करने की अपील की।हालांकि एंबुलेंस एवं आवश्यक सेवाओं वाले वाहनों को इस कार्यक्रम से दूर रखा गया तथा इनके आवाजाही में कोई दिक्कत नहीं होने दी जा गई  ।। जिला में बिधायक सुद्वीप कुमार सोनू , बिद्याक सरफराज अहमद , जिला अध्यक्ष संजय सिंह , प्रमिला मेहरा , तो वही डुमरी में जिला परिषद् अध्यक्ष राकेश महतो , डुमरी विधायक पुत्र अखिलेश कुमार उर्फ़ राजू , राजकुमार पांडेय , करि बरकत अली , जे एम  एम  के  अध्यक्ष  प्रखंड  निरंजन महतो , कॉग्रेस के महेश भगत , कॉग्रेस  के मनोज जैसवाल , माले के नागेंद्र महतो सहित सभी बिपक्षी दलों  के कार्यकर्ताओ की अहम भूमिका रही।    

जब किसान हाथों में कुदाल लेकर खेतों में उतरता है तो धरती हरी—भरी हो जाती है और जब वही किसान हाथ में झंडे लिए सड़कों पर उतरता है तो सरकार हिल जाती हैं. ये जमी कई किसान आंदोलन देख चुकी है पर आज जो हो रहा है वो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ! हमारा किसान, हमारी ही सरकार से इतना निराश कभी नहीं था, जितना आज है... क्या आप उसके साथ हैं? अगर हां तो अपनी बात रिकॉर्ड करें, फोन में नम्बर 3 दबाकर.

कृषि विधेयक के खिलाफ एक बार फिर किसानों का रोष आक्रोश में बदल रहा है. वे गांवों से निकलकर दिल्ली कूच करने की तैयारी में है.. हम आप से जानना चाहते हैं कि आप किसके साथ हैं?

किसान विरोधी कानून वापस लेने की मांग को लेकर भाकपा माले ने किया चक्का जाम एवं नुक्कड़ सभा का आयोजन। संवाददाता: (मोजाहिद अली) गांवां/ गिरिडीह: किसानो द्वारा सम्पूर्ण भारत बंद करने का आह्वान किया गया था, जिसके समर्थन में भाकपा माले पार्टी ने गांवां में पुरजोर तरीके से बंद का समर्थन कर विरोध प्रदर्शन कर एवं नुकड़ सभा कर कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी प्रखंड सचिव नागेश्वर यादव और संचालन अमीत कुमार बर्नवाल ने किया। मौके पर उपस्थित श्री नागेश्वर यादव ने भाजपा सरकार पर तिखा प्रहार करते हुवे कहे की ज़ब से केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है तब से आम जनता की स्थिति बतर हो गई है। आज देश की स्थिति इतना नाजुक हो गई है की गरीब - मजदूर, छात्र - नौजवान से लेकर किसान तक अपनी हक़ के लिये आज इस तानाशाही सरकार के खिलाफ रोड पे उत्तर आये है। हमारी पार्टी किसान विरोधी काला कानून वापस लेने की मांग करती है अगर भाजपा सरकार इस किसान विरोधी कानून को वापस नहीं लेती है तो यहाँ से लेकर दिल्ली का सत्ता हिलाने में भी यहाँ के किसान - मजदूर और छात्र - नौजवान पीछे नही हटेंगे। मौक़े पर प्रखंड कार्यकारी सचिव सकलदेव यादव, इंनौस के राष्ट्रीय परिषद सदस्य अशोक मिस्त्री, इंनौस के जिला कमिटी सदस्य अकलेश यादव,रंजीत यादव,पंकज कुमार, मनीष कुमार, पवन चौधरी, अशोक यादव, महेंद्र यादव, उपेंद्र यादव, सुशील राणा, विक्की यादव और दर्जनों नौजवान साथी मौजूद थे।

कृषि बिल 2020 के खिलाफ धनबाद जिला आम आदमी पार्टी का विरोध प्रदर्शन

केंद्र सरकार की ओर से कृषि सुधार बिल 2020 के तीन में से दो विधेयक रविवार को राज्यसभा में पारित हो गए. और राष्ट्रपति की मुहर के बाद यह क़ानून बन जाएगा. क्या किसान इस बिल से खुश हैं? क्या लगता है उनके लिए किस तरह की नई परेशानी होगी? इससे पहले वो अपना अनाज या कृषि उत्पाद कहाँ और कैसे बेचते थे ? क्या मंडी और निजी व्यापारी को बेचने में मुख्य फ़र्क़ क्या देखते थे? कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों क्या नुकसान होगा? एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट से जमाखोरी को कैसे बढ़ावा मिलेगा? क्या किसान के कृषि उत्पाद को बेहतर मूल्य मिलेगा?क्या किसान और निर्धन लोग मंहगे सामान खरीदकर कहा पाएंगे? अपनी सारी बातों और आशंकाओं को ज़रूर बताए फ़ोन में 3 नंबर का बटन दबाकर