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जिला धनबाद बाघमारा से राधू राय मोबाइल वाणी के माध्यम से पीडीएस बायोमेट्रिक मशीन की खासियत पर आधारित एक कविता प्रस्तुत कर रहे है जिसमे बता रहे है की उपभोक्ताओं में बढ़ती जा रही है बायोमेट्रिक मशीन देखने की जिज्ञासा जाने वो मशीन कैसा होगा।दुकानदारो को दी जा रही बायोमेट्रिक मशीन की ट्रैनिंग।

बीरबल महतो,जिला धनबाद के बाघमारा प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहना चाहते है कि उमा की इच्छाऐ सुनी उनकी इच्छाऐ सुनकर अच्छा लगा क्योकि उन्हें पॉयलेट बनने की इच्छा है इसलिए उन्हें पायलेट बनना चाहिए साथ ही इनका कहना है की प्रत्येक बच्चो की अपनी इच्छा होती है,अच्छी सोच होती है इसलिए जो पुरानी परंपराएं है उसे बदलना होगा क्योकि लड़कियां भी पॉयलेट बन सकती है और देश को भी चला सकती है,मंत्री,डॉक्टर और इंजीनियर भी बन सकती है इसलिए इन सभी चीजो की जानकारी माता-पिता को होनी चाहिए और माता-पिता को यही सोचना चाहिए की लड़का-लड़की में कोई अंतर नहीं है,उन्हें भेदभाव नहीं करना चाहिए सभी की इच्छा को पूरी करनी चाहिए ताकि देश का विकास हो सके।

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जिला धनबाद से बीरबल महतो जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की मैंने मोबाइल वाणी पर उमा की कहानी सुनी वो विज्ञानं एवम भूगोल पढ़ना चाहती है पर रस्ते में कुछ मनचले लड़को के कारण वह स्कुल नहीं जा पाती है। यह आज के समाज के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है। अत: हम सभी का कर्तव्य होता है की उनका विरोध करे जहँ भी कोई लड़का छेड़खानी करता है उसे डंटकर मुकाबला करे उमा जी से अनुरोध है की वे प्रत्येक दिन स्कुल जाए साथ ही अपने सहेलियों के साथ जाए अगर किसी कारण सहेली ना मिले तो परिवार के किसी सदस्य के साथ जाए। आज का मोबाइल की सुविधा है जिससे आप परोवर के साथ पुलिस को भी खबर कर सकते है

जिला धनबाद,प्रखंड बाघमारा,पंचायत छत्रुटांड़ अन्तर्गत मुरलीडीह से बीरबल महतो जी मोबाइल वाणी के माध्यम से सरकार द्वारा कराये जा रहे विस्थापन पर कहते है की सरकार विस्थापन के दौरान लोगो को उनके पुर्वजो की जमीन से हटाकर कही और एक टुकड़ा जमीन दे देती है जो सही नहीं है दूसरी बात यह है की सरकार द्वारा विस्थापन दौरान विस्थपितों से जो वादे करती है की उन्हें उनकी जगह से हटाकर दूसरे जगह पर जमीन या नौकरी दिया जायेगा पर सबको नौकरियां और जमीन नहीं मिलती है देखा जाए तो उनमे से मात्र 10 % ही लोगो को नौकरी मिलती है वो भी जिनकी ऊपरी स्तर तक पहुंच रहती है अन्यथा साधारण व्यक्तियो को तो मिलता ही नहीं है।विस्थापितों का कहना है की विस्थापन में जिनका एक टुकड़ा जमीन गया हो या सौ एकड़ जमीन सबको नौकरी मिलनी चाहिए। मुरलीडीह 20 -21 कोलयरी क्षेत्र में रह रहे लोगो का रहना मुश्किल हो गया है,खदान से काफी आवाज होने की वजह से दीवारों में दरारे पड़ गयी है। मुरलीडीह कोलयरी में देखा गया की जिनकी 2 एकड़ जमींन विस्थापन में चली गयी थी सिर्फ उन्हें ही नौकरी मिली और जिनकी 2 एकड़ से कम जमीन थी और जिनका गुजर बसर उसी से होता था उन्हें नौकरी नहीं मिली और अब वे पलायन कर रहे है।

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