बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की तीसरी कड़ी में यह बताया गया कि बाल विवाह करने से क्या -क्या नुक्सान हो सकता है। जिस तरह गरीबी की दुस्चक्र से निकलना मुश्किल होता है उसी तरह बाल विवाह के दुस्चक्र से भी निकलना मुश्किल होता है। और इससे पूरी एक पीढ़ी प्रभावित होती है। जब एक कम उम्र का व्यक्ति जिसका शारीरिक और मानसिक विकास अधूरा हो वो शादी के बंधन में बंध जाता है तो उसके बच्चे कैसे स्वस्थ हो सकते हैं । इतनी छोटी उम्र में तो शरीर गर्भधारण के लायक होता ही नहीं है तभी तो इस तरह की परेशानियां होती हैं । राजस्थान और बिहार के बाद सबसे ज्यादा बाल विवाह का चलन झारखण्ड में ही है। बचपन में बाल विवाह होने के कारण बच्चे सही से पढाई नहीं कर पाते जिसके कारण उनका मानसिक विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता है। वे कई तरह की जानकारी और ज्ञान से वंचित रह जाते हैं। इतना ही नहीं पढ़े लिखे न होने के कारण उन्हें अच्छी नौकरी भी नहीं मिल पाती। बाल विवाह के बाद कई सारे स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं। जैसे की प्रजनन से जुडी समस्या,कम उम्र में शादी मतलब कच्ची उम्र में गर्भधारण,जिसके कारण न सिर्फ माँ के जान को खतरा होता है बल्कि बच्चे भी अस्वस्थ रहते हैं और कई बार मृत भी पैदा होते हैं। और ये एक बहुत बड़ी वजह है की हमारे राज्य में मातृ शिशु दर बहुत ही ऊँचा है। बाल विवाह का दुस्चक्र इसी तरह चलता रहता है पर इसे तोड़ना मुश्किल है नामुमकिन नहीं। इसके लिए जरुरी है बाल विवाह के दूरगामी परिणामों को समझना और समाधान के तरफ कुछ ठोस कदम उठाना
बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की दूसरी कड़ी में यह बताया गया कि बाल विवाह का मतलब 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी कराना एक अपराध है। क्योकि इस उम्र में बच्चो का शारीरिक और मानसिक विकास पूरा नहीं हो पता है।साथ ही इस कड़ी में यह भी बताया गया कि झारखण्ड में 32% से अधिक लड़कों की शादी कम उम्र में ही करा दी जाती है। यह एक चिंता का विषय है। बाल विवाह का कारण केवल जानकारी का अभाव ही नहीं बल्कि गरीबी और दहेज़ भी एक मुख्य कारण है।लोग यह मानतें हैं की बेटियों की शादी कम उम्र में करने पर अधिक दहेज़ नहीं देना पड़ेगा।लेकिन कम उम्र में शादी करा देने पर वे परिवार नियोजन के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं और इस स्थिति में उन्हें कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।कम उम्र और जानकारी के अभाव में ही बच्चे होने का खतरा बन जाता है।दोस्तों आपके हिसाब से समाज में आज भी आखिर बाल विवाह क्यों किया जाता है।
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की पहली कड़ी में यह बताया गया कि बाल संरक्षण का मलतब बच्चों को हिंसा, बुरे विचार,शारीरिक,मानसिक या किसी तरह के शोषण और बेइज्जती से बचाना। इनसे प्रभावित बच्चों को सहारा और मद्दद प्रदान करना भी बाल संरक्षण का एक हिस्सा होता है. इस कार्य के लिए कई सारे आसरे गृह भी मौजूद हैं।सयुंक्त राष्ट्र के बाल संरक्षण अधिवेशन के मुताबिक 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों की गिनती बच्चो में की जाती है। समाज में कई तरीकों से बच्चों के साथ शोषण किया जाता है जैसे- बाल मजदूरी जंहा लोग बच्चो से इस लिए काम करवाते हैं क्योकि बच्चों को कम मजदूरी देना पड़ता है।साथ ही कानून एक्ट की भी जानकारी दी गई। बच्चों की सुरक्षा संबंधित कई सारी जानकारियों के बारे में बताया गया। दोस्तों क्या आपको भी लगता है की बाल विवाह एक हिंसा है। अगर हाँ तो क्यों और यदि ना तो क्यों नहीं।
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
