बाढ़ का पानी घटते ही पशुओं में तरह-तरह की बीमारी फैलने लगी है। बरसाती घास खाने के कारण कई पशु डायरिया से पीडि़त हैं। बुखार एवं अठगोरवा का प्रकोप बढ़ने के कारण पशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। विशनपुर निवासी राजू यादव ने बताया कि बाढ़ का पानी हटते ही पशुओं में बुखार एवं पेट खराब की शिकायत बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि पशु चिकित्सक आकर पशु का इलाज तो कर रहे हैं पर सुधार नहीं हो रहा हैं। वही दियारा क्षेत्र में पशु चिकित्सक की टीम लगातार पशु की इलाज में लगे हुए हैं। छह माह से पशुओं का टीकाकरण नहीं होने के कारण स्थिति भयावह होती जा रही है। बाढ़ के कारण पशुओं के लिए चारा की कमी एवं बाढ़ जनित बीमारियों से पशुओं के बराबर बीमार होने से स्थिति खराब हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव-गांव में पशुओं के बीमार होने के कारण दूध का उत्पादन भी कम हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ पशु चारे की कीमत बढ़ने और दूसरी तरफ दूध का उत्पादन कम होने से पशुपालकों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बाढ़ का पानी हटने के बाद पशुओं में अठगोड़वा एवं हीट स्ट्रेस अर्थात लू की बीमारी देखी जा रही है। बरसाती घास खाने से इक्का-दुक्का डायरिया की भी शिकायत मिली है जिसका उपचार किया जा रहा है।