*बजट नें बच्चों के बुनियादी हक की अनदेखी की।* राइट टू एजूकेशन फोरम, समस्तीपुर जिला ईकाई के संयोजक सुरेन्द्र कुमार नें कहा कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) फोरम नें आम बजट 2022-23 को लेकर अनिश्चितता और अदूरदर्शीता का वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि यह आरटीई कानून की अनदेखी करने वाला, शिक्षा में गैरबराबरी को बढ़ाने वाला और शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण की राह खोलने वाला बजट है। फोरम के मुताबिक, बजट के डिजिटल लर्निंग और ई-विद्या संबंधी प्रस्ताव निराशाजनक हैं। इससे वंचित वर्गों समेत अस्सी फीसदी बच्चों पर स्कूली शिक्षा के दायरे से बाहर होंने का खतरा मंडरा रहा है। बजट पर निराशा व्यक्त करते हुए फोरम नें कहा है कि तकरीबन डेढ़ साल से स्कूल बंद हैं जिससे छात्रों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। माननीया वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नें महामारी के गंभीर प्रभावों को तो स्वीकार किया है, लेकिन स्कूलों के सुरक्षित संचालन, उनके बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की दिशा में और कोविड महामारी में या अन्य आपात स्थिति में सरकारी तैयारी की कोई झलक उनके बजट में नहीं दिखी है। फोरम नें कहा है कि बजट के आधे-अधूरे और अदूरदर्शी प्रावधान बताते हैं कि सरकार स्कूली शिक्षा को लेकर बिल्कुल संजीदा नहीं है। बजट में बच्चों के बुनियादी हक की अनदेखी की गई है। उनके प्रति असंवेदनशीलता दिखाई गई है और बच्चों के प्रति संवैधानिक दायित्व को लेकर उदासीनता का परिचय दिया गया है।