एक तरफ सरकार सात निश्चय कार्यक्रम में तहत हर घर नल जल की योजना को धरातल पर उतारने में लगी है तो दूसरी तरफ उसकी इस राह में रोड़ा बनने का काम उसके ही मुलाजिम कर रहे है। प्रखंड के साहिट पंचायत में पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण चार दशक पुरानी पानी टंकी ग्रामीणों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है। विद्यापतिनगर प्रखंड परिसर स्थित पीएचडी द्वारा निर्मित 50 हजार लीटर क्षमता वाली ओवर हेड टंकी जर्जर हो गई है। जिसके किसी भी बना हुआ है। बताते चलें कि प्रखंड स्थित 60 फीट उंचा जलमीनार 1979 में बनाई गई थी। लेकिन पिछले 20 वर्षो से टंकी का उपयोग नहीं हो रहा है, जिसके चलते वर्तमान में सुबह शाम डायरेक्ट पाईप से ही जलापूर्ति किया जा रहा है। जिससे बराबर मोटर जलने की समस्या बनी रहती है। एक ओर जर्जर हो चुके पानी टंकी की मरम्मत की ओर किसी का ध्यान नहीं है तो दूसरी ओर पम्प रूम एवं कर्मचारियों का आवास भी जर्जर स्थिति में है। पानी टंकी के चारो ओर से बनी चारदीवारी भी टूट-टूट कर गिरने लगी है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो पानी टंकी धराशायी भी हो सकती है। जिससे जान-माल की हानि भी हो सकती है। बताते चलें कि इस टंकी से लगभग दस हजार घरों में जलापूर्ति की जा रही है। इसे विभाग की लापरवाही समझे या सरकार की उदासीनता मगर लोगों की सांसे किसी अनहोनी की आशंका में अटकी पड़ी है।पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।