जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, राष्ट्र सेवा दल और नेहरू युवा केन्द्र, समस्तीपुर के संयुक्त तत्वावधान में आज अख्तियारपुर स्थित संस्था कार्यालय पर कोरोना महामारी के बचाव के लिए गौरी शंकर चौरसिया की अध्यक्षता में आयोजित जागरूकता संवाद कार्यक्रम में सचिव सुरेन्द्र कुमार नें कहा कि इस महामारी में सतर्कता और संयम हीं बचाव है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग के भरोसे रहकर हम मौत को आमंत्रित करेंगे। इसलिए वक्ताओं नें कहा कि देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। लाखों लोग इस माहामारी के चपेट में है, हज़ारों लोग रोज मर रहें है। सरकार अपनें सरकारी फरमान के साथ हाज़िर है। सब कुछ सही नहीं होते हुए भी वो अपनी पीठ खुद थपथपा रही है कि हम है न! न बेड है, न ऑक्सीजन है और न एम्बुलेंस है। और तो और श्मशान और कब्रिस्तान में भी जगह नहीं मिल रही है। सरकार भी राजनीतिक दल चला रही है और विपक्ष में जो भी राजनीतिक दल हैं, उनको आम नागरिकों से मतलब नहीं है। दोनों पक्ष के आरोप प्रत्यारोप का एक हीं लक्ष्य है, सत्ता! ऐसे में जो हमलोग हैं, जो अपने को सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं, गांधी मार्गी कहते हैं, उनका क्या दायित्व है? केवल सोशल मीडिया पर सरकार पे उंगली उठाएं, सरकार के नाकामी के खिलाफ आवाज जरूर बुलंद करें, पर साथ हीं साथ अपनें नागरिक कर्तव्य को भी याद करें। हम कुछ ऐसा करें कि आम आदमी की इस महामारी से राहत मिले, हम अभी सड़क पर आ नहीं सकते, सभा- रैली निकाल नहीं सकते हैं तो हम क्या करें? तो आइए 01 मई, जो एक पवित्र दिन है, मजदूर दिवस है। उस दिन हम सब साथी सुबह 06 से संध्या 06 तक गांधी के मारक अस्त्र उपवास करें और अपने इस उपवास कार्यक्रम को देश स्तर पर आयोजित करें, सरकार को सचेत करें कि हम हाथ पर हाथ रख कर नहीं बैठें है। हम आज के स्थिति से चिंतित हैं और घर से शुरू हुआ यह गांधी का सत्याग्रह देश को जागरूक कर, मजबूती से खड़ा करेगी। तो आइए हम 01 मई को गांधी के उपवास को करें जो एक आजमाया हुआ अस्त्र है और यही नहीं रुकें, दिन भर उपवास के दौरान यह चिंतन करें कि देश को इस महामारी से मुक्त कैसे कर सकते है। एक दिन उपवास कर हम बैठ न जाएं, आगे की एक विस्तृत योजना बना हम कार्य करें। और चिंतन करें कि क्या-क्या हम कर सकते हैं? आज के इस परिचर्चा में दिनेश प्रसाद चौरसिया, वीणा कुमारी, बलराम चौरसिया, वीभा कुमारी, रविन्द्र पासवान, अर्चना कुमारी, किरण कुमारी, शीतल कुमारी, माला कुमारी, किसलय कुमार झा, मनीषा कुमारी, काजल राज, दृष्टि ओबेराय, कुमार गौरव, सृष्टि राज, दिपक कुमार चौरसिया, दिवाकर कुमार, लता सुमन, राहुल कुमार, अमरेश राम आदि नें अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह सार्वभौमिक स्वास्थ्य का मामला है, जिसे हम गाँधी के शांतिमयता के रास्ते हीं हांसिल कर सकते हैं। धन्यवाद ज्ञापन बचपन बचाओ आंदोलन के क्षेत्रीय कार्यकर्ता विजय कुमार चौरसिया द्वारा किया गया।